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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़ वधु ईरानी कलर के सूट-दुपट्टे में सजी हुई थी, वर ने फिरोजी शेरवानी, हाथ में तलवार पकड़ी हुई थी। एक नहीं, बल्कि एक साथ 17 जोड़े शनिवार को सेक्टर-40 के ग्राउंड में विवाह सूत्र में बंध गए। इस सामूहिक विवाह को करने की जिम्मेदारी निभाई फ्री गुरमत संगीत अकादमी ने। सिख रीति-रिवाज के अनुसार उनके चार फेरे हुए। बैंड बाजे के साथ वर-वधु पंडाल पर पहुंचे।
संगरूर के जोड़े भी आए यहां:
इस शादी को अटेंड करने के लिए संगरूर के वे 13 जोड़े भी आए, जिनकी अकादमी की ओर से 17 अक्टूबर को संगरूर में शादी करवाई गई थी। अकादमी ने नए जोड़ों को बधाई दी।
खुश हें हम:
तरसेम लाल और शालू ने बताया कि वे लव मैरिज करना चाहते थे और हमारी अकादमी ने मदद की। सामूहिक विवाह में अपनी शादी होने से वे बहुत खुश नजर आए। एक अन्य दूल्हे ने बताया कि जो उन्हें दहेज में सामान मिल रहा है, उससे वे संतुष्ट हैं।
बोझ हुआ कम: संगरूर के गांव में रहने वाली सरबजीत जब छोटी थी, तो उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। उसने बताया कि 17 अक्टूबर को अकादमी को ओर से उनकी शादी करवाई गई और वह खुश है। उसके पति दविंद्र खेती करते हैं। ननू मुस्लिम फैमिली से है,उसने बताया कि अकादमी ने उनकी शादी मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार की और पंडाल में उसका अलग से निकाह पढ़ा गया।
हमने उपकार नहीं किया : अकादमी के फाउंडर चेयरमैन भाई बलविंदर सिंह रंगीला ने कहा कि फैमिली वाले ये न समझे कि उन पर कोई उपकार किया गया है। यह हमारे समाज का कर्तव्य है कि हम सब मिलकर गरीब लड़कियों की शादी करें। उन्होंने कहा कि शादी में सभी लोगों ने बढ़चढ़ कर योगदान दिया है और इसमें एनआरआई भी पीछे नहीं हैं।