विदिशा. जिले में दस गांव ऐसे हैं जो मात्र 52 लोगों के कारण आबाद हैं। इन गांवों की जनसंख्या बरसों बाद भी इकाई का अंक पार नहीं कर पाई है। इनमें दो गांव तो ऐसे हैं जहां सिर्फ एक-एक व्यक्ति रहते हैं। ऐतिहासिक पहचान वाले विदिशा जिले में कुल 1533 गांव हैं, जिनमें से 253 गांवों में 200 से कम आबादी रहती है। लेकिन दस गांवों में तो रहने वाले लोगों की संख्या अंगुलियों पर गिनी जा सकती हैं।
सौ एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले यह गांव आज भी राजस्व रिकार्ड में आबाद ग्राम के रूप में दर्ज हैं। इसका पता वर्ष 2001 में हुई जनसंख्या के आंकड़ों से भी चलता है। जानकारी के अनुसार इन दस गांवों में पिछले वर्र्षो में कुछ गांवों में रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है, तो कुछ में घटी है। लटेरी तहसील का चकना हरखेड़ी गांव वर्ष 1971 की जनगणना में वीरान था, लेकिन अब वहां आठ लोग रह रहे हैं।
वहीं बासौदा तहसील के गांव भरछा में तीन दशक पहले करीब 70 लोग रहते थे, जो अब घटकर 4 रह गए हैं। बासौदा के तहसीलदार बीके मंदौरिया कहते हैं कि इन गांवों में लोग भले ही नहीं रह रहे हों, लेकिन यहां आसपास के गांवों के लोगों की जमीन है, जिस पर वे खेती करते हैं।
श्री मंदौरिया के मुताबिक बासौदा का गांव कादरपुर पहले वीरान था, लेकिन अब वहां एक व्यक्ति रहकर खेती कर रहा है। वे बताते हैं कि यह गांव भी राजस्व रिकार्ड में शामिल हैं। जिला सांख्यिकीय पुस्तिका के अनुसार जिले में आज भी 83 गांव वीरान की श्रेणी में शामिल हैं।
इन गांवों में रहने वालों की संख्या शून्य है। वर्ष 1971 के जनसंख्या बुक में इन वीरान गांवों की संख्या 108 थी। इस दौरान जिले में कुल आबाद गांवों की संख्या 1516 थी, जो अब बढ़कर 1533 हो गई है।
कम आबादी वाले गांव
नाम जनसंख्या
कादरपुर 1
खिरिया 1
नरयावल 3
भरछा 4
मिठापुर 4
दुन्तार 5
टिगरा 7
चकना हरखेड़ी 8
चिल्पाहांडी 9
सुमेरजागीर 10