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सोना हुआ महंगा तो क्यों न लें हीरा

भोपाल. रोशनी के त्यौहार को मनाने के लिए शहर की ज्वैलरी शाप भी तैयार हैं। गोल्ड के साथ अब डायमंड और प्लेटिनम ज्वैलरी का क्रेज भी बढ़ रहा है। गोल्ड ज्वैलरी की बढ़ती कीमतों के चलते उपभोक्ता अब डायमंड और प्लेटिनम ज्वैलरी में रुचि दिखा रहा हैं। ब्रांडेड डायमंड्स में नक्षत्र, आसमी, संगनी, एश्ट्रा आदि के अलावा शहर में बिना ब्रांड के डायमंड की ज्वैलरी भी खूब बिकती है।

ब्रांडेड की कीमत बिना ब्रांड की ज्वैलरी से दो-तीन गुना अधिक बताई गई। सूत्रों के अनुसार कमर्शियल, डीलक्स, सेमी डीलक्स और डी, ई, एफ, जी, एच आदि केटेगरी से पहचाने जाने वाले डायमंड में पारदर्शिता, कटाव, रंग, और वजन का महत्व होता है। जिस डायमंड के अंदर के कट जितने साफ और पारदर्शी होंगे उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है। डी केटेगरी का हीरा सबसे चमकदार माना जाता है।

अंतिम केटेगरी का हीरा ब्लैक होता है। एसआई केटेगरी के डायमंड थोड़े हल्के माने जाते हैं। बाजार में डायमंड ज्वैलरी जिनमें रिंग, पेडेंट सेट, चूड़ियां आदि 3000 से एक लाख और दस लाख रुपए से अधिक की कीमत में उपलब्ध हैं। सॉलीटर (सिंगल) डायमंड जड़ित ज्वैलरी की मांग अच्छी बताई जाती है।

प्लेटिनम: भोपाल में प्लेटिनम ज्वैलरी बेचने के लिए दो ज्वैलरों नयनतारा और अग्रवाल ज्वैलर्स ने लंदन बेस्ड प्लेटिनम गिल्ट आफ इंडिया से लायसेंस लिया है। जानकारी के मुताबिक प्लेटिनम के गहने 95 फीसदी शुद्ध प्लेन या डायमंड जड़ित बनते हैं। प्लेटिनम ज्वैलरी की खरीद पर डीलर द्वारा प्लेटिनम गिल्ट आफ इंडिया का सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है।

गौरतलब है कि प्लेटिनम की शुद्धता की जांच की सुविधा सिर्फ मुंबई में उपलब्ध है। जानकारी के अनुसार 2700 से 2800 रुपए प्रति ग्राम के भाव बिकने वाले प्लेटिनम की ज्वैलरी के कद्रदान शहर में बढ़ रह हैं। ज्वैलर्स श्याम मंगल के मुताबिक भोपाल में प्लेटिनम ज्वैलरी को पसंद करने वालों की संख्यां बढ़ी है। इसको पहनने वाले अजीब सा कांफिडेंस महसूस करते हैं।

ज्वैलर्स राजेश अग्रवाल के मुताबिक डायमंड और प्लेटिनम ज्वैलरी में निवेश बढ़ रहा है। ज्वैलरी के सर्टिफिकेशन को लेकर दुकानदार व ग्राहक दोनों ही जागरुक हो रहे हैं जिससे आगे डायमंड और प्लेटिनम ज्वैलरी का मार्केट और बढ़ने की उम्मीद है।





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