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कृत्रिम कॉर्निया

हैदराबाद.cornea भारत के दो वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मुंह के स्टेम सेल से आंखों के कॉर्निया के कृत्रिम निर्माण में सफलता प्राप्त की है। इस उपलब्धि से कॉर्निया की खराबी से दृष्टिहीनता के शिकार लाखों लोगों को फायदा हो सकता है। फिलहाल मरीजों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट कराना पड़ता है।

अब तक आंखों के करीब 500 ऑपरेशन कर चुके यहां के एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सांगवान ने अपनी सहयोगी डॉ. गीता वेमुगांती के साथ मिलकर पिछले हफ्ते दो मरीजों के मुंह की म्यूकस झिल्ली से स्टेम सेल निकालकर कॉर्निया बनाने की प्रक्रिया पूरी की।

सबसे बड़ी समस्या
कॉर्निया की खराबी दुनिया में अंधेपन की सबसे बड़े कारणों में से एक है। कई बार तो कॉर्नियल रिम खराब हो जाने के कारण भी मरीज को दिखाई देना बंद हो जाता है।

इलाज का खर्च
कॉर्निया की खराबी के कारण यदि मरीज पूरी तरह से दृष्टिहीन है तो उसके लिए प्रत्यारोपण का खर्च पहले महीने करीब 15,000 रुपए और एक महीने बाद 5-10 हजार के बीच आता है।

70 फीसदी सफलता
अमेरिका, जापान व इटली में भी कृत्रिम कॉर्निया बनाने के प्रयास हुए हैं। एलवी प्रसाद इंस्टीट्यूट का दावा है कि उनकी सफलता की दर 70 फीसदी है। स्टेम सेल से कॉर्निया बनाने में दो से तीन हफ्ते और लिमबल सेल से इसे बनाने में 10-14 दिन का समय लगता है।

* मार्च 2000 में हमने दो दृष्टिहीनों में कॉर्निया का सफल प्रत्यारोपण किया था। हमारे परिणाम अपेक्षा से कहीं बेहतर हैं।’
- डॉ. वीरेंद्र सांगवान, एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट हैदराबाद





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