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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़ एक ही छत के नीचे हिंदू व सिख मेडिटेशन में मस्त थे। मैरून रंग का चोला और गले में रुद्राक्ष की माला पहने हुए थे ये साधक। सेक्टर-24 के इंदिरा हॉलीडे होम में ओशो मेडिटेशन कैंप के तीसरे दिन बच्चे से लेकर बुजुर्ग वर्ग ने भाग लिया। यह कैंप स्वामी चैतन्य कीर्ति और मां योग शुक्ला के सहयोग से लगाया जा रहा है।
क्या हुआ शिविर में सक्रिय ध्यान: सक्रिय ध्यान के पहले सत्र में तेज व गहरी श्वास को अराजक ढंग से लिया गया। उसके बाद भावों की अभिव्यक्ति हंसकर और रोकर की।
तेज म्यूजिक के साथ नाचे संन्यासी: यहां कभी संन्यासी ‘हू-हू’ करते हुए कूदने लगे, तो कभी मौन व स्थिर रहकर विश्राम करने लगे। अंत में सभी ने नृत्य किया।
सत्संग ध्यान भी: इसमें गायत्री मंत्र का उच्चरण, अंग्रेजी में एक भाव के गीत, हृदय को शून्य करने के लिए मौन के अंतराल व ओशो की वाणी का श्रवण किया गया। नो डायमेंशन: इसमें पहले दायां हाथ दिल और बायां हाथ को नाभि में रखा। उसके बाद हाथ को अलग-अलग दिशाओं में लेकर गए और मुंह से आवाज निकाली। इसमें लाइट म्यूजिक की धुनें बजती रहीं। यहां ध्यान विधि, सूफी दरवेश नृत्य और विश्राम भी करवाया गया।
प्रश्नों का मिला जवाब:
दोपहर बाद प्रश्नोत्तर चर्चा में लोगों ने मन के विचार, तनाव, जीवन की उलझनों का ध्यान द्वारा मुक्ति व उपचार के बारे में प्रश्न पूछें। स्वामी चैतन्य कीर्ति ने उनका जवाब दिया।
कुंडलिनी ध्यान: इसमें 15 मिनट तक शरीर की रोएं-रोएं को कंपित करना और बाद में 15 मिनट नृत्य करके शांत स्थिर खड़े रहते हैं। शवासन में लेटते हैं। संध्या को नृत्य और ओशो प्रवचन की सीडी सुनाई गई।
शांति और खुशी की तलाश गुड़गांव के संदीप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वे बताते हैं कि 9 साल से ओशो मेडिटेशन से जुड़े हैं। ओशो मेडिटेशन खुश रहना और प्रेजेंट में जीना सीखाता है। पास्ट की बुरी बातों को हम दिल से निकाल देते हैं। दिल्ली के चार्टेड अकाउंटेट सुनीत कहते हैं कि आज के युग में कम्पीटिशन बढ़ गया है, जिस कारण यूथ स्ट्रेस में घिरते जा रहे हैं। ऐसे में यूथ शांति और खुशी की तलाश में मेडिटेशन का सहारा लेता है। पीयू के हॉस्टल से आई वैशाली और नेहा पहली बार कैंप अटेंड करने आई हैं। वे कहती हैं कि अपने भीतरी बिखराव को एकत्रित करने और संतुष्टि पाने की तलाश में कैंप में आए हैं।
अन्य मेडिटेशन कैंप में शांत होकर बैठाया जाता है, जो संभव नहीं हो पाता। मन भटक जाता है, लेकिन यहां का मस्ती और मेडिटेशन का स्टाइल रोम-रोम को आनंदित कर देता है। छठी क्लास की दीक्षा बताती है कि जब से संन्यासी बनी हूं, तब से माइंड अधिक शॉर्प हो गया है। बात करने का लहजा बदल गया है। थियेटर से जुड़ी जीवन सहाय ने बताया कि ओशो मेडिटेशन से जुड़कर उसने थियेटर से हटकर कुछ अलग करने की ठानी है। अब सेक्टर-19 में हीलिंग सेंटर चला रही है जिसमें लोगों को ओशो मेडिटेशन स्टाइल में हीलिंग करके बीमारियों से मुक्ति दिलाती है।