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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. सेना के आला अधिकारियों द्वारा छठे वेतन आयोग के समक्ष अफसरों और सैनिकों की शॉर्टेज और उसके कारणों पर दी गई प्रेजेंटेशन पर आयोग ने भी सहमति जताई है। सेना ने प्रेजेंटेशन और कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सीडीएम) की रिपोर्ट में वेतन-भत्तों को पांच गुना तक बढ़ाने की मांग रखी है। सूत्रों के अनुसार आयोग अप्रैल 2008 को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में सेना में वर्तमान वेतन ढांचे को सेना की डिमांड के अनुरूप बढ़ाने की सिफारिश कर सकता है।
पांच वर्ष के भीतर 3 हजार से अधिक टेक्निकल, एग्जिक्यूटिव और पायलेट्स प्रिमेच्योर रिटायरमेंट ले चुके हैं। मेजर और कैप्टन रैंक के 11 हजार से अधिक अफसरों की कमी है। सेना इन सबका कारण कमजोर वेतन ढांचे को मानती है।
सैनिकों से मिला आयोग: अब तक गठित पांच वेतन आयोग का कोई भी पैनल सेना के अधिकारियों से नहीं मिला। छठे वेतन आयोग के चेयरमैन जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा, सदस्य प्रो. रविंद्र ढोलकिया और जेएस माथुर तथा सदस्य-सचिव सुषमा नाथ ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ 19 अप्रैल 07 को मीटिंग की थी।
सीडीएम की रिपोर्ट : आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के प्रमुखों ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सीडीएम) से सेना में वर्किग कंडिशन पर स्टडी करवाई। इस स्टडी में सर्विस कंडिशन और सैनिकों की कमी को वेतन ढांचे से जोड़ कर प्रस्तुत किया गया। 65 हजार सैनिकों और अफसरों की कमी झेल रही सेना मानती है कि कम वेतन नौजवानों को फोर्सिज की ओर आकर्षित नहीं कर रहा। सीडीएम ने प्रस्तावित वेतन ढांचे का खाका भी बनाया है।
जनरल का वेतन डेढ़ लाख : छठा वेतन आयोग अगर सेना की डिमांड पर अप्रैल 2008 को अपनी सिफारिश सरकार को सौंपता है और उसे लागू किया जाता है तो चीफ ऑफ स्टाफ का वेतन 30 हजार (फिक्स) से बढ़कर डेढ़ लाख पहुंच जाएगा और लेफ्टिनेंट को भी 41 हजार तक वेतन-भत्ता मिलेगा।
सेना की वर्किग कंडिशन को देखते हुए सैलरी को पांच गुना करना जरूरी है। वेतन आयोग में सेना के प्रतिनिधि को भी शामिल करना चाहिए था। —ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह कालोंह एक्स सीडीएम