रावतभाटा-कोटा. रावतभाटा नगर पालिका के अस्थाई अध्यक्ष के चयन के लिए शनिवार को बुलाई बैठक में पार्षदों ने हंगामा कर दिया, इस दौरान उन्होंने आपस में
गाली-गलौच व हाथापाई भी की।
पुलिस ने बीच बचाव किया, पर हंगामा नहीं रुका। इसे देखकर ईओ ने बैठक निरस्त कर दी। उसके बाद 10 पार्षद बैठक से उठकर चले गए। बचे 13 पार्षदों ने कानूनी सलाह लेकर ममता किन्नर को सर्वसम्मति से हाथ उठाकर चेयरमैन चुन लिया। उसे बैठक की अध्यक्षता करने वाले पार्षद गंगाराम वाघ ने शपथ दिलाई।
पार्टीलाइन तोड़ी, दो गुट नजर आए
घटनाक्रम में पार्टीलाइन को तोड़ते हुए दो गुट नजर आए। दोनों ही गुटों में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलियों का संगम देखा गया। जहां ममता किन्नर गुट के साथ कांग्रेस के 3 व भारतीय जनता पार्टी के 6 एवं निर्दलीय 4 थे। जबकि दूसरे गुट में भी भाजपा के 2 कांग्रेस के 4 व निर्दलीय 4 नजर आए, जबकि एक पार्षद मंजूलता जंगम अनुपस्थित थी।
एक नजर..
पहलीबार हुई बैठक
संभवत: हाईकोर्ट के आदेश से प्रदेश में नगरपालिका अधिनियम 1959 के तहत पार्षदों द्वारा अस्थाई पालिकाअध्यक्ष चुने जाने के लिए बैठक हुई।
प्रदेश की पहली किन्नर चेयरमैन
सब कुछ विधिवत रहा तो पार्षद ममता प्रदेश की पहली किन्नर पालिका चेयरमैन होगी।
मौन रही लीला शर्मा
इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व पालिकाध्यक्ष लीला शर्मा अधिकतर समय मौन रही।
पुलिस ने की मशक्कत
इस बैठक में पुलिस को पार्षद से ज्यादा पुलिस बल लगाना पड़ा। रावतभाटा सी आई बीएस गोस्वामी स्वयं गुत्थम-गुत्था हो रहे पार्षदों को अलग कराते नजर आए।
नहीं थी भीड़, चुनिंदा नेता थे मौजूद
पिछलीबार अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पालिका की ओर भीड़ उमड़ पड़ी थी, लेकिन इस बार चुनिंदा नेताओं के अलावा कोई नहीं था। जिसमें कांग्रेस के नेताओं की संख्या अधिक थी।
गालियों की बौछार
पालिका बैठक में खूब गालियों की बौछार हुई। महिला पाषर्दों ने जिसकी खूब आलोचना की। मर्यादा का दोनों पक्षों ने ध्यान नहीं रखा।
ममता किन्नर को चेयरमैन बनाने व कानूनी सलाह लेने में भाजपा के पूर्व महामंत्री हरकचंद जैन व पूर्व मनोनीत पार्षद सुरेन्द्र कड़वासरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
* मैं स्वयं को अस्थाई अध्यक्ष मानती हूं। उच्च न्यायालय के आदेश पर पार्षदों की बैठक हुई। जिसमें मुझे अध्यक्ष चुना गया। बहुमत मेरे साथ है।
ममता किन्नर, पालिकाध्यक्ष (अस्थायी)
* उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में बैठक बुलाई थी। जिसमें पार्षदों द्वारा झगड़ा फसाद होने से बैठक को निरस्त कर दिया है। ऐसे में अपने आप चुनाव कर अध्यक्ष चुनना गलत है। मैं इसे स्वीकार नहीं करता। इस मामले में अगली बैठक मंगलवार को होगी।
—रामगोपाल गुप्ता, अधिशासी अधिकारी, रावतभाटा
* बैठक में जो घटना हुई अच्छी नहीं हुई। बैठक में गाली-गलौच एवं मारपीट की गई, जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है। ऐसे में सही अध्यक्ष का चुनाव हो ही नहीं सकता।
—लीला शर्मा, निर्वतमान पालिकाध्यक्ष