News
Rajasthan
Shekhawati Shekhawati झुंझुनूं. आप बाहर निकल रहे हैं और आपका मोबाइल डिस्चार्ज है, तो चिंता की कोई बात नहीं। झुंझुनूं की इप्सा अग्रवाल ने आपके लिए नायाब जूता तैयार किया
है। इप्सा का दावा है कि उसने ऐसा पावर शूज तैयार किया है जो आपके मोबाइल की बैट्री को चार्ज कर देगा, आपके रास्ते से अंधेरा मिटा देगा और चलते-चलते वाकमैन सुनने की इच्छा भी पूरी कर देगा।
विद्या भारती स्कूल भडार (सूरत) की बारहवीं विज्ञान में अध्ययनरत झुंझुनूं मूल की इप्सा पुत्री अशोक अग्रवाल ने अपने साथी जिनेश चौपड़ा, नीतेश जैन व विश्वनाथ पटेल के साथ इस पर काम शुरू किया। कड़ी मेहनत व लगन से इस टीम ने ऐसा जूता बनाने में सफलता हासिल की, जिससे चलते समय ऊर्जा उत्सर्जित होती है। इप्सा दावा करती है कि हर कदम के साथ पांच से छह वोल्ट की ऊर्जा पैदा होती है। इससे मोबाइल बैट्री चार्ज हो सकती है, वाकमैन चल सकता है और रोशनी के लिए बल्ब जलाया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी में आयोजित ‘आटोफेस्ट-07’ में इप्सा के इस माडल को ‘माडल योर फ्यूचर’ श्रेणी में पहला पुरस्कार दिया गया है।
यूं बनेगी बिजली: इप्सा ने दावा किया कि ‘जस्ट टेक ए वाक एंड एंजोय दी टाक’ की थीम पर तैयार इस जूते की हील में एक स्प्रिंग फीट की गई है। इसके साथ ही आगे एक छोटा पहिया व डायनोमा लगाया गया है। वाकिंग के दौरान जूते की स्प्रिंग दबेगी तो पहिए को बल मिलेगा और वह घूमने लगेगा। पहिए से जूते में लगा डायनोमा घूमेगा और उससे बिजली पैदा होगी।
यूं चार्ज होगा मोबाइल: इप्सा का दावा है कि कदम-कदम पर जूते में लगा डायनोमा पांच से छह वोल्ट वाला डीसी पावर पैदा करेगा। जूते के तले में बने ब्लाक में बैट्री लगाकर इसे चार्ज किया जा सकता है। करीब एक घंटे की वाकिंग में मोबाइल की बैट्री पूरी तरह चार्ज हो जाएगी। इसके अलावा वायर के जरिए इस ऊर्जा को मोबाइल, वाकमैन या बल्ब तक पहुंचाया जा सकता है।
यूं साबित होगा बहुपयोगी : इप्सा के दावे के अनुसार पावर शूज की क्षमता मोबाइल चार्ज करने तक ही सीमित नहीं है। इसमें आवश्यकता के अनुरूप केपेसिटी वाला डायनोमा फिट कर जरूरत के मुताबिक कम-ज्यादा ऊर्जा पाई जा सकती है। तीन से पांच मिली एम्पीयर बिजली से छोटे बल्ब जलाए जा सकते हैं। सेना व ग्रामीण क्षेत्र के काम करने वाले लोगों के लिए यह बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
फूले नहीं समाए परिजन: इप्सा की इस खोज का जब घरवालों को पता चला तो गर्व से उनका सीना फूल गया। झुंझुनूं में रह रहे दादा जगदीश प्रसाद बड़ाऊवाले, दादी संतरा देवी, चाचा मनोज व अनिल अग्रवाल, चाची अनिता व अंजू अग्रवाल, चचेरे भाई-बहन आयुष, उमंग, देवांशु, साक्षी आदि ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि पर खुशी जताई।
* जूते में ऐसा सिस्टम संभव है। फ्रेंड्स के साथ इसमें जुट गई और बना डाला पावर शूज। मेरा दावा है कि इससे बेहतर विकल्प और कुछ नहीं हो सकता।
- इप्सा अग्रवाल