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रनिंग रूम राम भरोसे

बिलासपुर. ट्रेन ड्राइवरों, असिस्टेंट ड्राइवरों और गार्ड के विश्राम के लिए बनाया गया विश्रामगृह(रनिंग रूम) अपने हाल पर ही रो रहा है। पिछले तीन माह से यहां की व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ी हुई है। 15 से 20 घंटे की ड्यूटी कर यहां पहुंचने वाले ड्राइवरों और गार्ड स्वयं पूरा काम करना पड़ता है और उन्हें दो-दो घंटे खाना नसीब नहीं होता। 26 अक्टूबर की रात बिलासपुर स्टेशन में स्थित रनिंग रूम में इसी बात को लेकर बवाल हो गया।

ट्रेन ड्राइवरों व गार्ड के लिए रेलवे ने रनिंग रूम की व्यवस्था कर रखी है, जहां उनके लिए काम से लौटने के बाद 8 घंटे तक आराम व भोजन की व्यवस्था रहती है। यहां के रनिंग रूम में रोज औसतन करीब 200 ड्राइवर, असिस्टेंट और गार्ड यहां पहुंचते हैं। दूसरे शहरों और कई किलोमीटर व कई घंटे के सफर के बाद यहां पहुंचे स्टाफ को 8 घंटे बाद कभी-कभी इससे कम समय में भी वापस फिर ट्रेन लेकर लौटना पड़ता है।

घर से दूर रहकर लगातार नौकरी कर रहे इन ड्राइवरों-गार्ड की सुविधा की रेलवे को जरा भी परवाह नहीं है। इस रनिंग रुम में भोजन बनाने का ठेका पूर्व में एक निजी ठेकेदार को दिया गया था। कुछ दिन काम संभालने के बाद वह ठेकेदार काम छोड़कर चला गया, फिर यह काम रेलकर्मियों को सौंपा गया। इसके बाद से ही यहां स्थिति लगातार बिगड़ती गई।

काम से लौटकर आने वाले ड्राइवरों को घंटों भोजन नहीं मिलता, जबकि नियमों के तहत इन्हें 45 मिनट में भोजन मिलना चाहिए। इसके चलते कई दफा मालगाड़ियां घंटों खड़ी रहती हैं। वहीं पैसेंजर ट्रेन के ड्राइवर होटलों में भोजन कर अपना काम चला लेते हैं। रनिंग रूम में साफ-सफाई, मेंटेनेंस और रूम सर्विस का काम ठेके में दिया गया है।

नियमों के तहत यहां एक मैनेजर व बैरा 24 घंटे हाजिर रहना चाहिए जिससे यहां पहुंचने वाले स्टाफ को तत्काल रूम मिल जाए व वहां बिस्तर की व्यवस्था हो जाए, लेकिन पिछले तीन माह से यहां मैनेजर व बैरा हमेशा नदारद रहते हैं। यहां पहुंचे स्टाफ को स्वयं चादर-तकिया तलाश कर पूरी व्यवस्था करनी पड़ती है। यहां के किचन में साफ-सफाई नहीं होने की शिकायत है।

टायलेट की सफाई नियमित नहीं होती। 26 अक्टूबर की रात भी यही स्थिति बनी। रात को रनिंग रुम पहुंचे ड्राइवरों को यहां कोई नहीं मिला। पलंग पर चादर भी नहीं बिछाई गई थी। इस स्थिति का ड्राइवरों ने विरोध करना चालू किया और धीरे-धीरे मामला तूल पकड़ता गया। देर रात में ही स्थिति की जानकारी अधिकारियों को दी गई। वहीं 27 अक्टूबर की सुबह यूनियन के नेता भी पहुंच गए।

इन सभी ने एक दफा फिर रनिंग रुम की बिगड़ी स्थिति की जानकारी अधिकारियों को दी। इतना सब कुछ होने के बाद भी रात तक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया था। लगातार शिकायत करने के बाद भी कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसी तरह का हाल मंडल के अलग-अलग स्टेशनों के सभी रनिंग रुम का है। रनिंग रुम की हालत सुधरने की जगह लगातार बिगड़ती जा रही है। इस संबंध में रनिंग रूम के प्रभारी सीनियर डीई श्री साहू से चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया।

डेढ़ किलोमीटर की पदयात्रा
रेलवे ने रनिंग रूम स्टेशन के दूसरी तरफ गणोश नगर जाने वाले रास्ते पर बनाया है। यहां तक पहुंचने के लिए ड्राइवरों को करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। रात को यह इलाका अंधेरे में डूबा रहता है। ऐसे में पैदल रनिंग रूम तक पहुंचना स्टाफ के लिए किसी खतरे से कम नहीं है।





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