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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. भारी विरोध और लंबे समय तक चले आंदोलनों के बाद अंतत: एनटीपीसी प्रबंधन ने भूविस्थापितों को नौकरी दे ही दी। ऐसे परिवार के 43 बेरोजगार युवकों को अलग-अलग पद पर नौकरी दी गई है। इसके बाद भी बिजली उत्पादन का रास्ता साफ नहीं हो पाया है।
सीपत में एनटीपीसी के लिए निर्माण कार्य प्रारंभ होते ही यहां भूविस्थापितों को नौकरी दिए जाने की मांग उठने लगी थी, लेकिन इसको लेकर प्रबंधन का रवैया शुरुआत से ही स्पष्ट नहीं था। कभी भी यह स्थिति स्पष्ट ही नहीं की गई कि विस्थापित परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाएगी या नहीं। इसके चलते ही एनटीपीसी के खिलाफ नाराजगी सबसे ज्यादा रही।
बिजली उत्पादन का समय करीब आते ही ग्रमीणों ने एनटीपीसी का जबरदस्त विरोध करना चालू किया। पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 50 दिन से भी ज्यादा ग्रामीणों क्रमिक भूख हड़ताल की। वहीं एनटीपीसी के जरिए आईटीआई का प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु भी आमरण अनशन में बैठ गए। इनमें से पांच की तबीयत बिगड़ जाने के कारण उन्हें हास्पिटल में भर्ती भी कराना पड़ा।
विरोध का सुर लगातार तेज होता देख इस मामले में जिला प्रशासन ने भी कड़ा रूख अख्तियार करना प्रारंभ किया। इसके बाद कहीं जाकर एनटीपीसी प्रबंधन झुका और भूविस्थापित परिवार के सदस्यों को रोजगार देने की दिशा में उपक्रम प्रारंभ हुआ। 25 अक्टूबर की रात दो बजे तक विस्थापित परिवार के सदस्यों का साक्षात्कार हुआ और इसके एक दिन पहल सभी की लिखित परीक्षा भी हुई थी।
इस पूरी कवायद के बाद 27 अक्टूबर को प्रबंधन ने भूविस्थापित कोटे से नौकरी पाने वालों की सूची जारी कर दी है। 43 युवकों को अलग-अलग फीटर, इलेक्ट्रीशियन, मेकेनिकल व लेब अस्टिेंड के पद पर नियुक्त किया गया है।
एनटीपीसी के सूची जारी करने के बाद ग्रामीणों के बीच खुशी का माहौल है और आंदोलनकारी भी इस निर्णय से प्रसन्न हैं। हमारे सीपत संवाददाता ने बताया कि आंदोलनकारी व भूविस्थापित परिवार के सदस्य इसे एनटीपीसी के खिलाफ अपनी पहली बड़ी जीत मान रहे हैं।
इतना हो जाने के बाद भी अभी तक आंदोलनकारी सीपत में बिजली पैदा होने देने के मूड में नहीं हैं। इनकी एक मांग तो पूरी हो गई है। अभी जो नियुक्ति हुई है, वह पूर्व में निकले 188 पदों में से की जा रही है। इसके बाद एनटीपीसी में निकलने वाले पदों में विस्थापितों की क्या स्थिति रहेगी।
इसे प्रबंधन को 10 नवंबर के पूर्व स्पष्ट करना है, जो अभी तक नहीं किया गया है। इसके चलते आंदोलनकारी रांक में एश लाइन का काम चालू नहीं होने देना चाहते हैं। इसके लिए वह अपनी तरफ से तैयार भी हैं। इसके चलते 43 लोगों की नियुक्ति होने के बाद भी सीपत में बिजली उत्पादन के लिए लगा रोड़ा हट पाएगा या नहीं, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है।
लेट-लतीफी से बिजली महंगी
बिजली उत्पादन का मामला लगातार लटकने का खमियाजा अंतत: बिजली उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ेगा। अगर बिजली उत्पादन समय पर होने लगता तो इसकी कीमत प्रति यूनिट 1.20 पैसे के आसपास पड़ती, लेकिन यह काम दो माह से ज्यादा खिंच जाने के कारण अब कीमत निश्चित तौर पर 25 से 30 पैसा बढ़ जाएगी।
एनटीपीसी द्वारा जारी सूची:
फीटर-8, इलेक्ट्रीशियन-20, डीपी मेकेनिकल-2, डिप्लोमा ट्रेनी इलेक्ट्रिकल-4, लैब असिस्टेंट-9.