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इस बार दीवाली 1 नवंबर से!

बिलासपुर. bilaspur वैसे तो रोशनी व खुशियों का पर्व दीवाली 9 नवंबर को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा, लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ में दीवाली की शुरुआत 1 नवंबर को ही हो जाएगी। यह सोच है उन महिलाओं की जो एक संगठन के बैनर तले कार्य पिछले कुछ वर्षो से कार्य कर रही है। लोगों की जमीन से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करने वाली राजकिशोरनगर समन्वय समिति की महिलाओं ने दैनिक भास्कर के अभियान एक दीया जलाकर तो देखो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बात कही।

शिक्षिका श्रीमती नीलिमा शर्मा कहती हैं कि दीया तो घर-आंगन को रोशन करता है। इससे घर में खुशी व समृद्धि आती है। चाहे घर में पूजा हो या फिर कोई त्योहार हम महिलाएं अपने घर में दीया जलाती है, तो राज्य की स्थापना दिवस पर क्यों नहीं। मैं इस दिन अपने घर-आंगन को दीयों से सजा दूंगी और अपने सहेलियों को इस दिन दीया जलाने का महत्व बताउंगी। दैनिक भास्कर का ये अभियान सफल हो ऐसी मेरी शुभकामना है और दीया जलाकर मैं औरों को संदेश दूंगी कि राज्य की उन्नति के लिए सभी इस दिन कम से कम एक दीया जरूर जलाएं।

श्रीमती तंद्रा बनर्जी कहती हैं कि हम शुभ कार्य शुरू करने से पहले, घर में प्रकाश फैलाने के लिए और पूजा शुरू करने से पहले दीया जलाती है। इसका मतलब ये है कि दीयों से हमारा पुराना नाता है। राज्य की स्थापना दिवस पर मैं दीया तो जलाउंगी ही इस दिन आसपास में मिठाइयां भी बाटूंगी, ताकि इस दिन को पूरी तरह पर्व की तरह मनाया जा सके।

श्रीमती ममता भट्टाचार्य कवितामय अंदाज में कहती हैं दीया से दीया जलते जाए, प्रदेश तरक्की करता जाए। आगे वह कहती हैं कि स्थापना दिवस पर तो पहले से ही दीया जलाना चाहिए था,लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है। मैं अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर इस दिन दीप प्रज्जवलित करूंगी, ताकि हमारा छत्तीसगढ़ देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदेश बने और तरक्की करे।

श्रीमती शशीकला कहती हैं कि दैनिक भास्कर ने अभियान की शुरूआत कर हमारी आंखें ही खोल दी हैं। हमने तो कभी सोचा ही नहीं था कि इस दिन दीया जलाना चाहिए। मुझे अब तो केवल उस घड़ी का इंतजार है, जब थाल में दीया सजाकर मैं अपने घर और आंगन को दीयों की रोशनी से जगमगाऊंगी। हमारे लिए ये दीवाली से कम नहीं होगा, हम इस दिन से ही दीवाली की शुरुआत मान लेंगे।

श्रीमती जेएस भारती कहती हैं कि प्रदेश की खुशहाली के लिए इस दिन राज्य की प्रत्येक महिला को इस दिन को पर्व की तरह मनाना चाहिए। उसे चाहिए कि वह अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर ईश्वर से प्रार्थना करे,ं ताकि हमारा राज्य दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की करे।

मीता बनर्जी कहती हैं कि यदि हम 1 नवंबर को अपने घरों में दीया जलाते हैं, तो पूरे देश में ये एक मिसाल होगा। मैंने कभी नहीं सुना कि किसी राज्य की स्थापना दिवस पर किसी ने दीया जलाया हो। दैनिक भास्कर को इस ओर ध्यान आकृष्ट करने के लिए सादर धन्यवाद।

गृहिणी श्रीमती बी. वनजा कहती हैं कि वह छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना दिवस पर पूरे परिवार के साथ राजधानी जाती है और राज्योत्सव में शामिल होकर इस दिन को सेलीब्रेट करती है। मैं भी इस दिन अपने घर में रोशनी व उन्नति का प्रतीक दीया जलाऊंगी। मैं अपनी बहन व सहेलियों को भी दीया जलाने प्रेरित करूंगी, ताकि प्रदेश तरक्की व खुशहाली के मार्ग पर अग्रसर हो।

श्रीमती शांता शर्मा कहती हैं मैं तो रोज ही दीया जलाकर संध्या आरती करती हूं। फिर इस दिन तो छत्तीसगढ़ का जन्मदिन है। मैं अपने घर के बच्चों का जन्मदिन मनाती हूं और इस बार मैं दीया जलाकर अपने छत्तीसगढ़ की समृद्धि व यहां रहने वाले सभी की खुशहाली के लिए ईश्वर से प्रार्थना करूंगी।





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