नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि सहमति के बावजूद नाबालिगों के साथ किया गया सेक्स बलात्कार माना जाएगा। इसके साथ ही यदि कोई व्यक्ति नबालिग को सेक्स के लिए किसी और को सौंपता है तो उसके ऊपर आईपीसी की धाराओं के तहत प्रोक्यूरेशन ऑफ माइनर गल्र्स का मुकदमा चलेगा। इस ममाले में आरोप साबित होने पर 10 साल तक की सजा हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरिजीत पसायत और पी सथशिवम की खंडपीठ ने बलात्कार के एक मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया। केरल निवासी इकबाल ने एक नाबालिग लड़की को त्रिसूर से कोयंबटूर लाकर उसके साथ सेक्स संबंध कायम किया था। नाबालिग लड़की अपनी मर्जी से कोयंबटूर आई थी और इकबाल ने लड़की की सहमति से उसके साथ सेक्स किया था।
इस मामले में केरल की सत्र अदालत ने उसे बलात्कार के आरोप में तीन साल कैद की सजा और आइपीसी की धारा 366 ए के प्रोक्यूरेशन ऑफ माइनर के तहत दो साल की सजा सुनाई थी। इकबाल ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन केरल हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद सुपी्रम कोर्ट ने इकबाल को केवल बलात्कार के आरोप में तीन साल की सजा को बहाल रखा है।
कोर्ट ने कहा कि प्रोक्यूरेशन ऑफ माइनर का केस इकबाल पर तब लागू होता जब वह उस लड़की को किसी और के साथ सेक्स के लिए ले गया होता। इकबाल ने खुद सेक्स किया इसलिए उसे केवल बलात्कार के मामले में सजा दी गई।