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आतंक का नया गढ़ बन रहा है मेघालय?

शिलॉंग. मेघालय में हथियार बरामद किए जाने और आतंकवादियों की गिरफ्तारी की पिछली कुछ घटनाएं संकेत दे रही हैं कि बांग्लादेश से सीमा साझा करने वाला यह उत्तर-पूर्वी राज्य हथियारों के डीलरों के लिए सुरक्षित स्थान बन रहा है और बांग्लादेश के लिए यहां से जाने का रास्ता तो है ही।

14 दिनों यानी एक पखवाड़े से भी कम समय में पुलिस ने यहां 11 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है जिनमें से आठ असम मूल गिरोहों के हैं और तीन मणिपुर के। इसके अलावा राज्य की राजधानी और उसके पास के इलाकों से हथियारों के दो बड़े जखीरे भी मिले हैं।

ताजा बरामदगी के बारे में पुलिस ने बताया कि शनिवार को पश्चिम खासी हिल्स जिले में 150 इलेक्ट्रॉनिक डिटोनेटर, 600 एल्युमिनियम सुपर प्लान डिटोनेटर, फ्यूज तारों के 15 रोल और 440 गेलेटाइन सिटक की कुर्की की गई है और यह सामान मरकासा से एक राज्य सरकार के रिटायर्ड अधिकारी के घर से मिला है।

पुलिस अधीक्षक एम खरक्रांग ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के पूर्व अधिकारी ख्रिन थाबा को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हथियारों के जखीरों की कुर्की का सिलसिला चिंता का विषय है और ये हथियार कहां से आ रहे हैं, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मेघालय के डीजीपी बीके डे सेवियन ने कहा था कि दक्षिणी गारो हिल्स जिले के बालपकरम नेशनल पार्क क्षेत्र में उल्फा, एनएससीएन-आईएम और एलएईएफ से जुड़े आतंकवादियों की गतिविधियां जारी हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि पार्क को आतंकी प्रशिक्षण शिविरों के रूप में काफी समय से इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि यहां लोगों की आवाजाही कम है और यह दूरस्थ इलाका है इसलिए यह नेशनल पार्क आतंकियों के लिए सेना से बचने के लिए भी एक सुरक्षित स्थान बन गया है।





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