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24 करोड़ की कोकीन समेत 3 पंजाबी पकड़े

चंडीगढ़.जालंधर जिले के तीन पंजाबी युवकों को रॉयल कनाडियन माउंटेन पुलिस ने करीब 24 करोड़ रुपए की कोकीन के साथ गिराफ्तार किया है। यह कोकीन अमेरिका से कनाडा स्मगल की जा रही थी। इस तस्करी में कनाडियन बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी का एक अधिकारी बलजिंदर सिंह कंडोला भी शामिल था। आरसीएमपी ने इस अधिकारी को भी गिरफ्तार कर लिया है। इंडो-कनाडियन नौजवानों ने कनाडा और अमेरिका में कोकीन और मरीजुआना की तस्करी का एक विशाल नेटवर्क बना लिया है। इनका नेटवर्क पंजाब, पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक फैला हुआ है। कनाडियन सुरक्षा एजेंसियां लगातार इन पर नजर रख रही हैं और बीते समय में कई पंजाबी नौजवान कोकीन की तस्करी करते हुए पकड़े गए हैं।

इस मामले के खुलासे से पहले आरसीएमपी ने इस गैंग की गतिविधियों पर करीब 13 महीनों से नजर रखी। इस मामले में जो दो अन्य पंजाबी युवक भी गिरफ्तार किए गए हैं, उनके नाम शमिंदर सिंह जोहल, (34) और हरमन सिंह रियाड़ (26) हैं। इन दोनों की बॉर्डर ऑफिसर बलजिंदर सिंह कंडोला से मिलीभगत थी। खुफिया ऑप्रेशन के दौरान ही कंडोला की मिलीभगत का पता चल गया था। उसके बाद उसे रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

शनिवार को पैसिफिक हाईवे से जौहल और रियाड़ की लग्जरी कारें जैसे ही अमेरिका से कनाडा में दाखिल हुईं, उन्हेंरोक लिया गया। उस समय उनकी कारों में 208 किलोग्राम कोकीन थी। उनके पास दो लाख डॉलर कैश और तीन रिवाल्वर भी थे। उनकी कारों को कंडोला ने बिना जांचे ही आगे जाने दिया। इन दोनों ने भी जानबूझ कर कंडोला वाली पोस्ट से ही पास करवाया जबकि उस वक्त चैक पोस्ट पर अन्य कई लाइनें खाली थीं।

यह तीनों पंजाबी नौजवान पंजाब के जालंधर जिले से संबंधित हैं और दोनों तस्कर रिचमंड हिल में रहते हैं। कंडोला सरी में रहता है। स्थानीय पुलिस इस मामले के अन्य सूत्र भी जोड़ रही है और उसे लग रहा है कि यह गैंग किसी बड़े इंटरनेशनल गैंग से जुड़ा हुआ है जो बड़े पैमाने पर कोकीन की तस्करी कर रहा है।

इंडो-कनाडियन ड्रग माफियाकनाडा में करीब 50 इंडो-कनाडियन गैंग सक्रिय हैं, जिनके सदस्यों की संख्या 5 से 50 तक है। यह गैंग स्मगलिंग से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी से सुपारी किलिंग तक के तमाम काम करते हैं। इनकी आपसी लड़ाईयों में भी कई पंजाबी नौजवान मारे गए हैं। इंडो-कनाडियन गैंगों की चीनी गैंगों से भी भिंड़त हो चुकी है।

जून, 2002 में 31 वर्षीय रोबी कंडोला को विरोधियों ने गोलियां से छलनी कर दिया था। वह खुद भी एक गैंगस्टर था। गुरदिश तूर, 29 साल का एक अन्य गैंगस्टर है जो इसी साल अगस्त में दिल्ली में 100 किलो एफीड्रिन के साथ पकड़ा गया था। जिसका बाजार में मूल्य करीब 24 मिलीयन डॉलर है। तूर भी कनाडियन राज्य ब्रिटिश कोलंबिया का ही रहने वाला है।

>> ब्रम्पटन निवासी हरजिंदर सिंह बासी को 3 सितंबर, 2007 को गिरफ्तार किया गया था। उसने भी भारत से 550 किलोग्राम एफीड्रिन मंगवाई थी, जो पकड़ी गई।

>> एक अन्य कनाडियन राजिंदर सिंह को अक्टूबर में ही भारतीय पुलिस ने गिरफ्तार किया है। राजिंदर हांगकांग निवासी एक अन्य व्यक्ति की मदद से अपनी ही लैब में नशीले पदार्थ बनाने की कोशिश कर रहा था।

लगातार होते कत्ल

बीते एक साल में कनाडा के ओंटारियो, ब्रिटिश कोलंबिया और अलबरटा राज्यों में 100 से अधिक ऐसे नौजवान मारे गए हैं जो कि पंजाबी परिवारों से संबंधित थे। कोकीन, मरीजुआना, एकेटसी आदि नशों के कारोबार में लगे गैंगों की आपसी लड़ाई में यह सभी मर्डर हुए। हालत यह है कि आरसीएमपी ने इंडो-कनाडियन ड्रग माफिया पर नजर रखने के लिए एक विशेष टीम ही बना रखी है। ईजी मनी के चक्कर में पंजाबी नौजवान लगातार इस ड्रग माफिया का हिस्सा बनते जा रहे हैं।





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