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असली परीक्षा तो अब

सम्पादकीय. इंदौर में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अब तक किए गए प्रयासों का फल है। पिछले कई महीनों से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान सहित कई मंत्री और अधिकारी प्रदेश में अधिक से अधिक निवेशकों को लाने के प्रयास में जुटे थे। इसमें उन्हें सफलता भी मिली और दो दिन में सरकार और निवेशकों के बीच एक लाख 20 हजार करोड़ रुपए के निवेश के 102 करार हुए।

सरकार इन आकंड़ों के बहाने खुद की पीठ थपथपा सकती है लेकिन उसे ध्यान रखना होगा कि ये करार अभी कागज पर ही हैं और जब तक ये कागजों से निकलकर प्रदेश की जमीन पर नहीं आते तब तक आमजन को कुछ हासिल नहीं होगा। प्रदेश सरकार ने पहला कदम सफलतापूर्वक बढ़ा दिया मगर आगे का रास्ता तभी तय होगा जब वह निवेशकों से किए गए वादों को ईमानदारी से पूरा करेगी।

उसे न सिर्फ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना होगा बल्कि व्यवस्थागत खामियां भी दूर करना होंगी अन्यथा पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद भी निवेशक सरकारी विभागों की भूलभुलैया में भटकते रहेंगे और अन्य शासकीय कार्यो की तरह ये प्रोजेक्ट भी समय-सीमा लांघ जाएंगे।

बरसात के दिनों में प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर से भोपाल का 190 किलोमीटर का सफर छह घंटे में भी पूरा नहीं होता है। अगर सरकार ने इस स्थिति में बदलाव नहीं किया तो निवेश भी रास्ते में अटका रहेगा।

प्रदेश के जिन इलाकों में निवेश प्रस्तावित है उनकी कनेक्टिविटी बढ़ाना होगी। अनिल अंबानी जब इंदौर से उज्जैन खुद कार चलाकर महाकाल के दर्शन करने गए तो उन्हें सड़कों की स्थिति का अंदाजा हो गया होगा।

इसी तरह जिन निवेशकों ने पूर्व में प्रदेश में निवेश कर रखा है या जो यहां के शासकीय विभागों की कार्यप्रणाली से वाकिफ हैं और अगर उन्होंने फिर भी विश्वास जताया है तो उसके पीछे मुख्यमंत्री का सबकुछ ठीक कर देने का आश्वासन ही है।

अब यह आश्वासन चुनावी न साबित हो इसका खास ध्यान रखना होगा अन्यथा निवेशकों ने करार किया है निवेश नहीं, उन्हें पीछे हटने में देर नहीं लगेगी। ऐसी स्थिति न बने इसलिए सभी राजनीतिक दलों खासकर कांग्रेस को प्रयास करना होगा।

प्रदेश के गठन के बाद चहुंमुखी विकास का अवसर पहली बार आया है। यह अवसर हकीकत बन सके इसलिए सभी राजनीतिक दलों को सम्मिलित प्रयास करना होगा। जिन राज्यों के नेताओं ने दलगत राजनीति से परे जाकर ऐसे अवसरों की दस्तक सुनी है आज वे विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल हैं। अगर यह अवसर हाथ से निकल गया तो पता नहीं प्रदेश को फिर और कितने साल इंतजार करना होगा।





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