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200 नेत्र सहायक बर्खास्त

रायपुर. स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के अस्पतालों में पदस्थ 200 से ज्यादा नेत्र सहायकों को एक-एक कर नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इनकी नियुक्ति पैरामेडिकल कोर्स के आधार पर की गई थी। एक साल का कोर्स था। अब कहा जा रहा है कि नेत्र सहायकों के लिए दो साल की ट्रेनिंग जरूरी है। उनकी बर्खास्तगी से पैरामेडिकल कोर्स की मान्यता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

जिन सहायक नेत्र सहायकों को नौकरी से निकाला गया है, उनकी नियुक्ति दो से चार साल के बीच हुई थी। अलग-अलग आदेश जारी कर उन्हें निकाला गया है। स्वास्थ्य संचनालय के अफसरों ने उन्हें तर्क दिया कि पैरामेडिकल कोर्स नेत्र सहायक के लिए निर्धारित मापदंड की परिधि में ही नहीं आता। नेत्र सहायकों के लिए कम से कम दो साल की ट्रेनिंग जरुरी है।

पैरामेडिकल के तहत नेत्र सहायक का कोर्स एकवर्षीय है। बताते हैं कि संचालनालय के अफसरों और नेत्र सहायकों के बीच शनिवार को जमकर बहस हुई। जगदलपुर, सरगुजा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कांकेर के 100 से ज्यादा नेत्र सहायक संचालनालय में इकट्ठा हुए थे। उन्होंने सीधे संयुक्त संचालक और नेत्र प्रोग्राम के प्रभारी डा. बीएस सार्वा से चर्चा की।

डा. सार्वा ने उन्होंने दो टूक में कह दिया कि आप लोगों की नियुक्ति गलती से हो गई थी। नौकरी देते समय जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया। अब नियमों का परीक्षण के करने के बाद आप लोगों को सर्विस से अलग कर दिया गया है।

बताते हैं कि नेत्र सहायकों ने जब उनसे पूछा कि हमारा कोर्स करवाने वाले और नौकरी देने वाले जिम्मेदार डाक्टरों के खिलाफ क्या कोई एक्शन लिया जाएगा? इस बारे में अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से पूरा पैरामेडिकल कोर्स और उसकी ट्रेनिंग सवालों के दायरे में हैं। अभी कोर्स 14 जिलों में चलाया जा रहा है।

क्या है पैरामैडिकल कोर्स
पैरामेडिकल कोर्स जोगी शासन काल में 16 अगस्त 2001 में अस्तित्व में आया। डा. योगेंद्र बड़गैंया को इसका संचालक बनाया गया था। उन्होंने रायपुर मेडिकल कालेज में 270 सीटों के साथ कोर्स चालू किया गया।

पहले साल पैरामेडिकल कोर्स के दौरान पैथालाजी, एक्स-रे, ईसीजी, आर्थोपेडिक और नेत्र सहायक की ट्रेनिंग दी गई। अगले वर्ष चार और सब्जेक्ट की ट्रेनिंग बढ़ाने के साथ-साथ इसे प्रत्येक जिले के जिला चिकित्सा और मेडिकल कालेजों में शुरु कर किया गया।

>> अस्पतालों में किस तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है, इस बात की जानकारी हमें नहीं है। हम तो इतना जानते हैं कि दो साल की ट्रेनिंग के बिना नेत्र सहायक की नियुक्ति नहीं की जा सकती।
डा. बीएस सार्वा, संयुक्त संचालक





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