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180 करोड़ का भुगतान रोका

रायपुर. स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने विभाग में सारे भुगतान पर रोक लगाकर सभी बिलों की आडिट शुरू करवा दी है। कहा जा रहा है कि उपकरण और दवा खरीदी में पिछले दो सालों में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। हाल में चार कंपनियों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस में एफआईआर लिखाई है। इन कंपनियों ने शासन को ब्रांडेड माल सप्लाई करने के नाम पर लोकल माल की सप्लाई की और करोड़ों का नुकसान पहुंचाया।

बताते हैं कि इन्हीं कंपनियों की अन्य सहयोगी कंपनियों ने भी प्रदेश भर में दवा और उपकरणों की सप्लाई की है। इनमें एक कंपनी की दर्जनभर से अधिक सहयोगी कंपनी होने की सूचना मिली है। इस तरह की सूचना मिलने के बाद श्री अग्रवाल ने विभागीय अफसरों को बुलाकर दो साल में की गई खरीदी के बारे में जानकारी एकत्र की। इस दौरान कई सूचनाएं सही पाई र्गई। रोके गए बिल करीब 180 करोड़ रुपए के बताए जा रहे हैं।

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि कई खरीदी के बिल गायब हो चुके हैं। करीब 50 करोड़ रुपए के बिल नहीं मिलने की बात सामने आई है। इस कारण सभी जिलों के सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं कि सोमवार तक बिल प्रस्तुत कर दिए जाएं। बिल नहीं आने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

दो दिन पहले श्री अग्रवाल सभी जिलों के सीएमओ को दवा व उपकरण की खरीदी का हिसाब लेकर बुलवाया था। बैठक में ज्यादातर सीएमओ ने हिसाब पेश नहीं किया। गुस्साए स्वास्थ्य मंत्री बैठक छोड़कर चले गए थे। दूसरे ही दिन उन्होंने भुगतान रोकने के आदेश जारी कर दिए। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

सूत्रों का यह भी दावा है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अफसरों ने खरीदी में गड़बड़ी की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से की थी। उसकी प्रारंभिक जांच कराई गई तो पता चला कि लोकल कंपनियों ने बड़ी कंपनियों का लेबल लगाकर दवा और उपकरणों की सप्लाई की।

जांच अधिकारी ने उन कंपनियों के बड़े अफसरों से बात की तो पता चला कि उन कंपनियों ने छत्तीसगढ़ में दवा सप्लाई के लिए न तो टेंडर भरा है और न ही राज्य शासन से उन्हें कोई आर्डर मिला है। स्थानीय कंपनियों ने बड़ा खेल करते हुए अफसरों की मिलीभगत से बड़े घपले को अंजाम दिया। इस बीच सूचना मिली कि एक अफसर ने आज कंपनी के अफसरों को एक होटल में बुलाकर बिल प्रस्तुत करने कहा है। इस प्रयास को लीपापोती से जोड़कर देखा जा रहा है।

दोषी कंपनियों पर कार्रवाई-अग्रवाल :
स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने फर्जी बिलों पर भुगतान न हो जाए, इस बात को ध्यान में रखते हुए भुगतान रोकने के आदेश दिए हैं। आने वाले 10 दिनों में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उसके बाद जिन कंपनियों को भुगतान करना है, उनको परेशानी नहीं होगी। दोषी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

निशाने पर कंपनियां
मेसर्स मधु इंटरप्राइजेस रायपुर, मेसर्स श्री इंटेक्स मोवा, मेसर्स ट्रिनीट्रान मेडिकल सिस्टम धमतरी, मेसर्स छत्तीसगढ़ सर्जिकल शंकरनगर के खिलाफ पुलिस में एफआईआर लिखाई गई है। आशंका है कि इन्हीं कंपनियों की सहयोगी कंपनियों के द्वारा दवा और उपकरणों की खरीदी किए जाने की सूचना है।





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