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कैंपस में क्राइम

रायपुर.campus कैंपस में हाई फाई लाइफ स्टाइल का क्रेज बढ़ा है। जाहिर है, इसके लिए पैसों की जरूरत पड़ रही है। जिन छात्रों की रुचि पढ़ाई में है, वे तो सुरक्षित हैं, लेकिन एक वर्ग ऐश करने के लिए पैसों के पीछे भागने लगा है। क्राइम की शुरुआत यहीं से हो रही है। छात्रों की क्रिमिनल टेंडेंसी का अध्ययन कर चुके पुलिस अफसरों का मानना है कि बाहर से आकर प्रोफेशनल कालेजों में पढ़नेवाले छात्र क्रिमिनल्स और क्राइम के जाल में फंस रहे हैं।

पं. रविशंकर विश्वविद्यालय कैंपस के आसपास के आधा दर्जन कालेजों में सभी छात्रों के लिए हास्टल पर्याप्त नहीं है। नतीजतन, सैकड़ों छात्र बाहर रूम लेकर रहने लगे हैं। ऐसे छात्रों को क्रिमिनल्स जल्दी अपने जाल में फंसा रहे हैं, क्योंकि उनपर कालेज या हास्टल प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है।

पोद्दार हत्याकांड में जितने भी छात्रों की लिप्तता है, सभी बाहर रूम लेकर रह रहे थे। इन्हीं में से कुछ गैंगबाजी में भी इनवाल्व हो गए हैं। गणोश पोद्दार हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस को कैंपस में होने वाले कई सनसनीखेज क्राइम का भी पता चला, जिनमें रिपोर्टें नहीं हुईं और मामले रफा-दफा कर दिए गए।

एएसपी क्राइम अजातशत्रु बहादुर सिंह ने बताया कि जांच के दौरान बाहर रूम लेकर रहनेवाले कई छात्रों के बारे में पता चला कि वे देर रात रूम पर लौटने और बार-ढाबों में बैठने के अभ्यस्त हो गए हैं। कई बार अनजाने में ही ऐसी जगहों पर छात्र क्राइम में इनवाल्व होने लगे हैं। क्रिमिनल माइंड वाले स्टूडेंट्स ऐसे लोगों से मेलजोल बढ़ाकर आसानी से क्राइम में इनवाल्व हो सकते हैं।

चूंकि कालेज में हमउम्र लोगों की कमी नहीं रहती, इसलिए इनके लिए गैंग बनाना ज्यादा आसान है, जैसा इंजीनियरिंग छात्र प्रशांत सिंह ने किया है। पोद्दार हत्याकांड में फंसे पांचों छात्रों के बारे में टीचर्स का कहना है कि वे जब तक हास्टल में थे, कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं था। बाहर रूम लेकर रहने लगे, तब उनकी गतिविधियों में क्राइम शामिल हो गया।

जूनियरों की रैगिंग, लोगों को धमकाना, प्रोफेसरों से बदसलूकी, कैंपस में छिपकर शराब-सिगरेट का सेवन और छेड़छाड़ जैसी कई शिकायतें इनके खिलाफ आईं लेकिन दब गईं। कुछ दिन में इस गिरोह की शहर के क्रिमिनल्स में अच्छी धाक बनी और वसूली वगैरह का काम मिलने लगा। प्रशांत गैंग को पोद्दार से वसूली की सुपारी मिली थी। उसे अंजाम देते समय हत्या हो गई।

कैंपस में सब कुछ
दैनिक भास्कर टीम को सर्वे के दौरान कालेजों के ही छात्रों ने बताया कि हास्टलों और कैंपस के आसपास शराब से लेकर गांजा तक चौबीसों घंटे उपलब्ध होने लगा है। कालेजों के आसपास कारोबार करनेवाले ऐसे लोग आइडेंटिफाई हैं। जरूरतमंद छात्र सीधे इनसे ज्यादा कीमत पर नशे की सामग्री खरीद रहा है।

कैंपस में ज्यादातर अपराध भी नशे में ही किए जा रहे हैं। पोद्दार हत्याकांड में पुलिस ने सौरव तिवारी नाम के युवक को हमलावर बताया है। पुलिस को सूचना मिली है कि वह वारदात के समय नशे में धुत्त था, इसलिए उसने पोद्दार पर चाकू से बेतहाशा वार किए।

>> प्रोफेशनल कालेजों में बाहर से आने वाले छात्रों में हजार में से एकाध ही क्रिमिनल मानसिकता वाले निकलते हैं। आपराधिक प्रवत्ति के छात्रों में इतनी शक्ति होती है कि वह आसपास खौफ का माहौल बनाकर भी गैंग तैयार कर लेता है।
केके सुगांधी, डायरेक्टर, एनआईटी

>> बाहर से आने वाले उन छात्रों में ऐसी प्रवृत्ति डेवलप होने लगती है, जिनके माता-पिता भरपूर पैसे भेजते हैं। वे समझते हैं कि बच्चे को तकलीफ न हो, लेकिन कुछ बच्चे गलत फायदा उठाने लगते हैं और क्राइम में लिप्त हो जाते हैं।
यूके जैन, प्राचार्य, न्यू जीईसी

>> यह पालकों की ढिलाई का नतीजा है। कालेज की उम्र स्थानांतरण की उम्र कहलाती है, जब बच्च एडल्ट बनता है। इस उम्र में गलत संगति या आजादी का गलत फायदा उठाने वालों की मानसिकता अपराधियों जैसी होने लगती है।
गीता तिवारी, प्राचार्य, साइंस कालेज

>> हाल में मर्डर केस में फंसा आयुर्वेद कालेज का छात्र अन्य कालेजों के छात्रों का दोस्त था और उसका समय वहीं गुजरता था। उसकी कक्षा में उपस्थिति काफी कम रही, लेकिन परिजनों ने कभी पूछा नहीं। शायद इसलिए वह अपराधियों में फंस गया।
डा. डीके तिवारी, डीन, आयुर्वेद कालेज





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