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‘भास्कर’ की खबर पर पुलिस को नोटिस

इंदौर.

मानवाधिकार आयोग ने आईजी से मांगी रिपोर्ट

हीरानगर थाने की हिरासत में पिटाई से हुई मौत को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग ने आईजी राजेंद्रकुमार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने ‘भास्कर’ की खबर को आधार बनाकर यह नोटिस दिया है। खातीपुरा के घनश्याम मंडलोई को 20 अक्टूबर को हीरानगर पुलिस पूछताछ के लिए लाई और पेड़ से बांधकर बेरहमी से पिटाई की जिससे उसकी मौत हो गई। उसके बाद थाने में जबर्दस्त तोड़फोड़, आगजनी और आंदोलन हुए।

सूत्रों के मुताबिक मानवाधिकार आयोग ने ‘भास्कर’ में छपी खबर में दिए गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले और पुलिस पर उठाए सिलसिलेवार सवालों को आधार बनाया। थाने में उपद्रव के अगले दिन अधिकारियों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिटाई से मौत की पुष्टि करते हुए टीआई सहित चार को निलंबित किया था। आयोग ने तीन दिन पहले आईजी राजेंद्रकुमार को नोटिस देकर 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

सूत्रों के मुताबिक आयोग के सवालों को लेकर अधिकारी दुविधा में हैं। इन सवालों में घनश्याम को किस आधार पर पूछताछ के लिए लाया गया? उसके विरुद्ध पहले कोई अपराध दर्ज था या नहीं? थर्ड डिग्री का इस्तेमाल क्यों किया?

पुलिसकर्मी निजी कार में पीटते हुए पहले कहीं ले गए थे, फिर थाने लाकर पेड़ से बांधकर भी पिटाई की? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कमर के हिस्से के नीचे लाठियों के 30 से ज्यादा निशान और मांसपेशियां फटने जैसे सवाल शामिल हैं। आयोग रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ तो अपने स्तर पर जांच कराएगा।

दो मामलों में हुए उलटफेर
17 मई 2006 केंद्रीय जेल, जबलपुर में पप्पू निवासी गुगरी की हालत बिगड़ी और 12 घंटे बाद मौत हो गई। मजिस्ट्रियल जांच में बीमारी के कारण मौत होना बताया गया। मानवाधिकार आयोग ने डीएसपी से जांच कराई तो पता लगा मौत जिस बीमारी से हुई वह 50 साल से ज्यादा उम्र में होती है जबकि मृतक 23 साल का था।

यह भी स्पष्ट हुआ कि उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी। इस रिपोर्ट के बाद आयोग ने मृतक के परिवार को दो लाख रुपए हर्जाना देने और सीआईडी जांच का कहा था। प्रदेश सरकार को लिखा उक्त जेल अधिकारियों की प्रदेश के किसी भी जेल में पोस्टिंग नहीं की जाए।

सागर में एनकाउंटर में मारे गए व्यक्ति के पिता और पत्नी ने अलग-अलग याचिका लगाई। दोनों जांच में पाया गया पुलिस ने उसे गोली मारी थी लेकिन क्यों? स्पष्ट नहीं हुआ। इस पर मानवाधिकार आयोग ने अलग से जांच कराई तो दो तथ्य उजागर हुए।

एक तो जिस पुलिसकर्मी ने गोली मारी थी उसकी मृतक से रंजिश थी। दूसरा पुलिस ने ही दाह संस्कार कर दिया। इन दोनों पर आयोग ने सख्ती बताई। संशोधित एक्ट 12-बी के तहत हाई कोर्ट की अनुमति लेकर आयोग विचाराधीन प्रकरण में अपना पक्ष रख सकता है।

रिपोर्ट तो पहले ही भेज दी
>> हिरासत में मौत की रिपोर्ट नियम के तहत विभाग पहले ही भेज देता है। इस मामले में भी दी गई। साथ में मजिस्ट्रियल और ज्युडिशियल जांच तो चल ही रही है।
राजेंद्रकुमार, आईजी





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