इंदौर.
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए करार धरातल पर उतर आते हैं तो प्रति व्यक्ति आय (पर कैपिटा इनकम) में लास्ट टेन में शामिल मप्र टॉप टेन राज्यों में आ जाएगा। हालांकि राह आसान नहीं है। सरकार की असली परीक्षा करारों पर दस्तखत के बाद ही शुरू हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार सुधार और उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। इस बारे में ‘भास्कर’ ने सरकार और उद्योगपतियों से चर्चा की।
जो दृश्य सामने आया है वह उत्साहजनक है -अमित मंडलोई की रिपोर्ट
पर कैपिटा इनकम में सात प्रश का इजाफा:
विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश की पर कैपिटा इनकम 19,700 रु. है। नए निवेश से सालाना 7 प्रश की बढ़ोतरी का अनुमान है। एक साल में 21,079 हो जाएगी।
सकल घरेलू उत्पादन 10 प्रतिशत :
प्रदेश का सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) 1.31 लाख करोड़ रुपए है। विशेषज्ञों का मानना है समिट के करार फलीभूत हुए तो जीडीपी में पहले दो सालों में 9 और बाद में 10 फीसदी उछाल आएगा। अभी यह 8 प्रतिशत के आसपास है।
15 हजार मेगावॉट बिजली :
प्रदेश में 2990.2 मेगावॉट बिजली बनती है। केंद्र से मिलने वाली बिजली भी शामिल कर लें तो 4637 मेगावॉट बिजली ही उपलब्ध होती है। समिट के करार सफल हुए तो बिजली उत्पादन क्षमता 15,000 मेगावॉट हो जाएगी। तब मप्र बड़ा बिजली निर्यातक राज्य होगा।
40 हजार प्रोफेशनल हर साल :
अभी प्रतिवर्ष 35 हजार तकनीकी व 2.3 लाख अन्य ग्रेजुएट तैयार हो रहे हैं। 11 नई निजी यूनिवर्सिटी आती हैं तो तकनीकी ग्रेजुएट में आठ तथा सामान्य ग्रेजुएट में पांच प्रश सालाना वृद्धि होगी।
टैक्स रेवेन्यू ढाई गुना :
प्रदेश के उद्योगों का सालाना टर्न ओवर 40 हजार करोड़ है जिस पर 6300 करोड़ रु. टैक्स चुकाते हैं। 40 प्रश प्रोजेक्ट भी सफल हुए टैक्स रेवेन्यू ढाई गुना बढ़कर 15,000 करोड़ रु. तक पहुंच जाएगा।
साढ़े तीन लाख नए रोजगार
-उद्योगों में फिलहाल करीब 2.4 लाख लोग काम कर रहे हैं। नए निवेश के बाद यह आंकड़ा साढ़े पांच लाख के आसपास होगा।
इंदौर-भोपाल में बनेंगे औद्योगिक नगर
सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपति जल्द ही निगम को करोड़ों रुपए संपत्तिकर देने के बजाय उस पूंजी से क्षेत्र का विकास करते नजर आएंगे। राज्य सरकार ने इस क्षेत्र के साथ भोपाल के गोविंदपुरा में ‘औद्योगिक नगर’ गठित करने का निर्णय लिया है।
इसमें उद्योग संवर्धन नीति२00४ और कार्ययोजना के तहत दोहरी कर प्रणाली खत्म कर औद्योगिक नगरों के रखरखाव का जिम्मा जनभागीदारी-स्वशासी समितियों को सौंप दिया जाएगा। यह निर्णय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा मप्र नगर पालिक निगम अधिनियिम-१९५६ और मप्र नगर पालिका अधिनियम-१९६१ के अंतर्गत लिया गया।
भोपाल में हुई उद्योग सलाहकार परिषद की बैठक में इस पर तेजी से काम करने की अनुशंसा की गई। उद्योग मंत्री जयंत मलैया ने बताया औद्योगिक नगरी घोषित होने के बाद समिति सदस्यों की संख्या और वार्डो की संख्या-सीमाएं राज्य सरकार तय करेगी। हर वार्ड में एक सदस्य निर्वाचित होगा। निर्धारित सदस्यों में से एक तिहाई सदस्य औद्योगिक नगरी के वार्डो से निर्वाचित, एक तिहाई राज्य सरकार और शेष सदस्यों के नाम औद्योगिक स्थापनाओं द्वारा निर्दिष्ट होंगे।
चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से होगा। समिति में एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होगा। नगर समिति में एक कार्यपालिक अधिकारी राज्य सरकार प्रतिनियुक्ति पर भेजेगी। समिति पांच साल के लिए चुनी जाएगी। उसके काम, शक्तियों एवं कामकाज के संचालन की प्रक्रिया राज्य सरकार तय करेगी।
सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र
सेक्टर -६ सड़क- ३४ किलोमीटर इकाइयां- १८00 छोटी-बड़ी सालाना संपत्तिकर- सवा करोड़ - मिलें बंद होने के बाद ५0 हजार लोगों को रोजगार मिला - डेढ़ हजार करोड़ से ज्यादा का सालाना टर्नओवर और सवा सौ करोड़ रेवेन्यू परेशानियां स्ट्रीट लाइट, सफाई व सीवरेज नहीं कुछ सेक्टर्स में सड़क नहीं ढेर सारे अतिक्रमण कर सवा करोड़, सुविधा शून्य सांवेर रोड औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष हरि अग्रवाल के अनुसार औद्योगिक नगर और स्वशासी समितियों के गठन से व्यवस्थित विकास होगा। अभी तो निगम करीब सवा करोड़ रुपए साल संपत्तिकर वसूलता है और सुविधा शून्य।
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र (भोपाल)
सेक्टर- ९ क्षेत्रफल- 700 एकड़ सड़क- २९ किलोमीटर इकाइयां- पंजीकृत ११00, वर्किग ८00 सालाना संपत्तिकर- ४५ लाख रुपए करीब एक हजार करोड़ टर्नओवर। रेवेन्यू सौ करोड़। १५ हजार से ज्यादा को रोजगार।
परेशानियां -स्ट्रीट लाइट, पानी सप्लाई, सीवरेज और सफाई व्यवस्था नही।
शिकायत भी नहीं सुनते गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष राजेश खरे के अनुसार करोड़ों का रेवेन्यू देते हैं लेकिन फायदा कुछ नहीं। बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम हैं। शिकायत करने पर टालमटोल होती है। नगर बनने के बाद अपने पैसे से अपने क्षेत्र के लिए सुविधाएं जुटा पाएंगे।