भोपाल.
अरेरा कालोनी, विद्या नगर और एमपी नगर जैसे पाश इलाकों से बिजली कंपनी को एक यूनिट बिजली सप्लाई करने पर तीन से चार रुपए मिलते हैं। करोंद और चांदबड़ जैसे इलाकों में तो कंपनी को 55 से 75 पैसे मिल रहे हैं। कंपनी को भोपाल में अब भी एक यूनिट बिजली पर 65 पैसे का नुकासन उठाना पड़ रहा है।
इसकी वजह इन इलाकों में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी होना है। इन इलाकों के वैध कनेक्शनधारी भी बिल नहीं जमा करते। विद्युत वितरण कंपनी इन दिनों हर यूनिट बिजली का हिसाब जुटा रही है। कंपनी प्रबंधन ने मैदानी अमले को साफ कर दिया है कि जिन इलाकों से राशि नहीं मिलेगी, वहां वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंप दी जाएगी।
यही वजह है कि राजधानी के करोंद में वितरण व्यवस्था फ्रेंचाइजी को सौंप दी गई है। छोला, चांदबड़ और जहांगीराबाद की वितरण व्यवस्था भी जल्द ही फ्रेंचाइजी के हवाले हो जाएगी। अरेरा कालोनी, एमपी नगर और विद्या नगर जैसे इलाकों में तो कुछ महीनों में एक यूनिट बिजली पर चार से साढ़े चार रुपए वसूली हुई है।
कोई हिसाब नहीं
भोपाल में अगस्त में 12 करोड़ यूनिट बिजली सप्लाई हुई। इसमें से करीब सात करोड़ यूनिट बिजली वैध कनेक्शनधारियों तक पहुंची। पिछले साल अगस्त में लगभग दस करोड़ यूनिट बिजली सप्लाई हुई थी और साढ़े पांच करोड़ यूनिट के बिल जारी हो पाए थे। इस तरह से लगभग आधी बिजली का कंपनी के पास कोई हिसाब नहीं होता कि उसका कहां उपयोग हुआ?
घाटा-कंपनी के अधिकारियों के अनुसार औद्योगिक, व्यावसायिक व रहवासी क्षेत्रों में बिजली की दर का औसत लगभग साढ़े तीन रुपए प्रति यूनिट होता है। सितंबर में कंपनी ने औसत 2 रुपए 85 पैसे वसूले इसके बावजूद कंपनी को एक यूनिट बिजली पर 65 पैसे का नुकसान हुआ।
>> वसूली बढ़ाने के साथ चोरी पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया है। जिन इलाकों में स्थिति नहीं सुधरेगी, वहां फ्रेंचाइजी के माध्यम से वसूली और रखरखाव का काम होगा।
पीके मिश्रा, मुख्य अभियंता भोपाल क्षेत्र, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी