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दो कूबड़ वाले ऊंटों को बचाने के लिए संस्थान बनेगा

बीकानेर. ठंडे प्रदेशों में रहने वाले दो कूबड़ वाले ऊंट अब विलुप्त होने के कगार पर हैं। देशभर में इनकी संख्या सिर्फ 55 बची है। इसमें भी कुछ नेचुरल डैथ के नजदीक हैं।

सरकार इन ऊंटों के विलुप्त होने से परेशान है और बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने जम्मू-कश्मीर में दो कूबड़ वाले ऊंटों पर आधारित जम्मू के लेह में नया अनुसंधान संस्थान स्थापित करने का मन बनाया है। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान संस्थान, बीकानेर और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच कई चक्रों की बातचीत हो चुकी है। संस्थान के लिए जगह भी तय हो गई है।

11वीं पंचवर्षीय योजना में इस विषय को तत्काल शामिल किया गया है। नवंबर के अंत तक संस्थान की स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह संस्थान एनआरसीसी, बीकानेर का सब सेंटर होगा। एक कूबड़ वाले ऊंटों के लिए बीकानेर सेंटर पहले से ही स्थापित है। दरअसल भारत में दो प्रकार के ऊंट पाए जाते हैं जिसमें एक कूबड़ वाले गर्म व दो कूबड़ वाले ठंडे प्रदेश में पाए जाते हैं।

एनआरसीसी, बीकानेर में इन ऊंटों पर शोध नहीं हो सकेगा क्योंकि वे ऊंट यहां के वातावरण में नहीं रह सकते। हालांकि ब्रीडिंग के लिए वैज्ञानिकों की तकनीक एक ही है लेकिन अंतर मौसम का है। इसी कारण दूसरा संस्थान स्थापित करना होगा।

भारत-चीन व मंगोलिया में हैं दो कूबड़ वाले ऊंट
भारत सहित तीन देशों में ही दो कूबड़ वाले ऊंट पाए जाते हैं। भारत के अलावा चीन व मंगोलिया शामिल है लेकिन भारत में अब यह प्रजाति विलुप्त होती जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में बचे ऊंटों से ही इनकी संख्या बढ़ाई जाए वरना चीन-मंगोलिया से इस प्रजाति का जर्मप्लाज्म मंगाना पड़ेगा। उसके बाद ही ब्रीड तैयार हो सकेगी।

* शीघ्र ही इनको नहीं बचाया गया तो भारत की बड़ी धरोहर गायब हो जाएगी। इन्हें बचाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार हुआ है और इस पर अनुसंधान कार्य होगा। जम्मू में सिर्फ दो कूबड़ वाले ऊंटों पर अनुसंधान कार्य शुरू कराए जाने की योजना तैयार हो रही है।
डॉ.के.एम.एल.पाठक, निदेशक, एनआरसीसी





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