जोधपुर. सतरंगी रोशनी में पश्चिम के नोमेडिक बैंड और लंगा मांगणियार कलाकार प्रस्तुत कर रहे हैं म्हारे लेहरिया रा नौ सौ रुपिया रोकड़ा सा..सामने दर्शक भी
नाचने लगे तथा तालियां बजा कर कलाकारों का उत्साह बढ़ा रहे थे। यह दृश्य था राजस्थान इन्टरनेशल फोक फेस्टिवल के तहत मेहरानगढ़ स्थित जनानी ड्योढ़ी में रविवार शाम आयोजित फ्यूजन कार्यक्रम का।
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट तथा जयपुर विरासत फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस फेस्टिवल की अंतिम शाम में पूरब व पश्चिमी लोक संगीत की संस्कृति उस समय साकार हो उठी जब दुर्ग स्थित जनानी ड्योढ़ी पर एमस्टरडम से आए तरहाना ग्रुप के सदस्यों ने पहले जिप्सी संगीत व बाद में राजस्थानी कलाकारों के साथ जुगलबंदी करते हुए एक के बाद एक दिलकश तरानों की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति इतनी जानदार थी कि कार्यक्रम में बैठे दर्शक अपने को रोक नहीं पाए और झूमते हुए नाचने लगे।
जिप्सी संगीत ने मनमोह लिया
तरहान बैंड के सदस्यों ने कार्यक्रम की शुरुआत जिप्सी संगीत से की।अली तुरनाम, सेलेस्ते, डुल्गा व मुल्तान, छुक-छुक सहित राजस्थानी शहनाई वादन का जाज ड्रम के साथ जुगलबंदी की।
जम कर नाचे पर्यटक
मेहरानगढ़ के साढ़े पांच सौ से अधिक वर्ष के इतिहास में यह पहला मौका था जब दुर्ग पर आयोजित किसी संगीत कार्यक्रम में देशी-विदेशी पर्यटक जम कर नाचे। बुकर अवार्ड विजेता अरुंधती रॉय सहित अनेक देशी विदेशी पर्यटक लेहरिया गीत के बोलों व जॉज की धमक पर अपने को रोक नहीं पाए तथा प्रमुख अतिथियों व मंच के बीच खाली पड़े स्थान पर आ गए तथा नाचने लगे। देशी पर्यटकों ने लूर लेनी शुरू की तो विदेशियों ने रॉक करना शुरू किया। मंच के सामने बैठे अन्य दर्शकों ने अपनी जगह खड़े हो कर ताल में ताल मिलाते हुए क्लेपिंग की।
दुर्ग पर पहली बार आयोजित इस पांच दिवसीय समारोह ने ऐसा रंग जमाया जिसकी गूंज इन्टरनेशनल सर्किट में कई वषों तक गूंजती रहेगी। इससे सूर्यनगरी के पर्यटन व्यवसय में आने वाले वर्र्षो में जबरदस्त बूम आएगा। इस प्रयास के लिए पूर्व नरेश गजसिंह व मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की जितनी सराहना की जाए वह कम होगी।
इन पर था फ्यूजन का दारोमदार
इस ऐतिहासिक म्यूजिकल फ्यूजन कार्यक्रम को अंजाम देने वालों में जोधपुर के नितिन हर्ष सहित तरहाना के एग्जीक्यूटिव नील वान थे। इन्होने दो वर्ष पहले ईरान में तथा अब सूर्यनगरी में इस फ्यूजन का निर्माण कर राजस्थानी व नोमेडिक जिप्सी संगीत को अंतरराष्ट्रीय जामा पहनाया। जिप्सी संगीत का उद्गम राजस्थान से माना जाता है इस लिए इस कार्यक्रम को बैक टू द रूट्स का नाम भी दिया गया।
राजस्थान रत्न सम्मार्न से नवाजा
कार्यक्रम के आरंभ में पूर्व नरेश गजसिंह ने प्रथम इन्टरनेशनल फोक फेस्टिवल में प्रदर्शन करने पर जयपुर के पंडित कृष्ण मोहन भट्ट सहित नगाड़ा वादक रामाकिशन, लाखा खां मांगणियार, शहनाई वादक पेफे खां मांगणियार, खड़ताल वादक गाजी खां लंगा, कमायचा वादक शाकर खां मंगणियार तथा कालबेलिया श्रीमती राजक सपेरा को राजस्थान रत्न से सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व नरेश ने कलाकारों व पर्यटकों का आभार व्यक्त किया।
ये थे कलाकार
तरहाना ग्रुप के बोरिसोव पेट्रोव ने जॉज ड्रम, हस्सी डयूने ने बेस गिटार, ओजान अकिबास ने साज व वोकल, एलेक्स सिमू ने सेक्सोफोन व क्लोरोनेट तथा फ्रैंज वॉन चौकसी ने की बोर्ड तथा सजान ने एफ्रो एंटोनियन पक्र्यूसन पर संगत की। जब कि राजस्थानी कलाकारों में फिरोज खां ने ढोलक, पेहप खां मंगणियार ने शहनाई, घेवर खां ने कमायचा, खेते खां ने खरताल, लाखा खां ने सारंगी तथ हबीब खां लंगा ने अलगोजा पर कला का प्रदर्शन किया।
जसवंत थड़ा पर आज होगा समापन
फेस्टिवल का समापन सोमवार सुबह 6.30 बजे जसवंत थड़ा पर प्रभाती भजनों के साथ होगा। जिसमें राजस्थानी कलाकार भजनों की प्रस्तुति करेंगे।
निंबूड़ा व लेहरिया का रंग जमा
तरहाना ग्रुप व राजस्थानी कलाकारों के एक सप्ताह के रिहर्सल के बाद तैयार हुए फ्यूजन का आलम यह था कि पहले निंबूड़ा तथा बाद में लेहरिया के बोल व जाज, सेक्सोफोन, बेस गिटार व की बोर्ड की सहायता से इन्टरनेशनल रंगों में सराबोर हो गए। मांगणियार व लंगा कलाकारों ने तरहाना के साथ अंतिम प्रस्तुति के रूप में सूफी गीत अंत बाहर की खबर नहीं और रंग ही रंग जमाया की इतनी जबरदस्त प्रस्तुति दी कि जनानी ड्योढ़ी में मौजूद दर्शक अपनी जगह पर थिरके बिना नहीं रह सका। इस बार मंच पर जैसन सिंह ने अपने मुंह से बैंड व ड्रम की आवाज निकालते हुए अनोखी जुगलबंदी का प्रदर्शन किया।