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करवा चौथ का व्रत आज

जोधपुर. कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर सोमवार को अखंड सुहाग के लिए महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी। इस वर्ष महिलाओं को चौथ का चांद दिखाई नहीं देगा, karwachauthपंचमी के चांद को ही अध्र्य देकर उन्हें व्रत खोलना पड़ेगा।

पंडित ओमदत्त शंकर महाराज ने बताया कि जोधपुर में चंद्रोदय 8.27 बजे होगा। सोमवार को रात 8.02 मिनट पर चतुर्थी तिथि खत्म हो जाएगी। इसलिए चांद तो पंचमी का होगा, लेकिन चतुर्थी का ही माना जाएगा।

पंडित ओमदत्त शंकर महाराज ने बताया कि करवा चौथ को बारह कला युक्त चंद्रमा के दर्शन होते हैं, इसलिए महिलाएं करवा चौथ के रूप में मां गौरी की पूजा करतीं हैं और व्रत रख कर मां गौरी से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, साथ ही चंद्रमा को अध्र्य देकर व्रत खोलती हैं। इस दिन महिलाएं सुहाग के प्रतीक के रूप में काजल, बिंदी, मेहंदी और धान करवा माता को भेंट करती हैं। महाराज ने बताया कि वैशाख, भाद्रपद, कार्तिक व माघ के चतुर्थी व्रतों का विशेष महत्व माना गया है। इनमें से कार्तिक का चतुर्थी व्रत सबसे बड़ा माना जाता है।

महिलाओं ने खरीदी पूजन सामग्री
करवा चौथ की पूर्व संध्या पर रविवार को घंटाघर और सोजती गेट क्षेत्र में महिलाओं ने व्रत के लिए पूजन सामग्री खरीदी। इस दौरान रोली, मोली, करवे, मेहंदी, बताशे व चौथ माता की कहानी की किताबों की खूब खरीदारी की गई।

सात घरों से मांगे सात रुपए
चतुर्थी का चांद दिखाई नहीं देने से होने वाले नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए कुछ महिलाओं ने अपने हिसाब से इसका तोड़ तलाश लिया है। रविवार को शास्त्रीनगर, खांडा फलसा और हाउसिंग बोर्ड सहित आसपास की कॉलोनियों में कई महिलाओं ने सात घरों से एक-एक रुपया मांगा। इन सात रुपयों से उन्होंने सुहाग सामग्री खरीदी। कुछ महिलाओं ने रविवार को चूड़ा भी पहना।

सिंधु शास्त्र की व्याख्या
पंडित ओमदत्त शंकर महाराज के अनुसार करवा चतुर्थी व्रत के लिए धर्म सिंधु शास्त्र में इस प्रकार व्याख्या दी गई है। ‘अत्र कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, चंद्रोदय व्यापिनी ग्राrा, पर दिन एवं चंद्रोदय व्याप्तो परैव। अभय दिने चंद्रोदय व्यापित्वे, तृतीया युतैव(पूर्वेव:) ग्राrा, दिन द्वये चंद्रोदय व्याप्त अभवि परैव।’ तृतीया और चतुर्थी को अर्थात दोनों दिन चंद्रोदय में चतुर्थी तिथि होवे तो पहले दिन(तृतीया में) यह पर्व करें। दोनों दिन चतुर्थी नहीं हो, चंद्रोदय के समय, तो यह व्रत दूसरे दिन अर्थात चतुर्थी को करना चाहिए। इस वचनानुसार करवा चौथ सोमवार 29 अक्टूबर को होगी।

51 वर्ष बाद बना ऐसा योग
पं. ओमदत्तशंकर महाराज ने बताया कि 1956 में ऐसा योग आया था, जब करवा चौथ का पंचमी में चंद्रोदय हुआ था। उसके बाद इस वर्ष ही ऐसा योग बना है। उनके अनुसार इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन पंचमी में अध्र्य देने और व्रत खोलने के कारण महिलाओं को चतुर्थी के व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। हालांकि नकारात्मक प्रभाव नहीं के बराबर होता है लेकिन फिर भी स्थानीय महिलाएं इसे दूर करने के लिए अपने-अपने ढंग से उपाय करती हैं।





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