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अल्पबचत योजनाओं से रूठे निवेशक

कोटा. दीवाली पर बम्पर नकद राशि, कारें और सोने-चांदी के सिक्के नहीं मिलने से निवेशक रूठ गए हैं और इस साल दीवाली पर भरने वाली पोस्टऑफिस की sensexतिजोरियां खाली हो रही हैं। अक्टूबर से मार्च तक राज्य में सर्वाधिक अल्पबचत होती रही है लेकिन दो साल से रजत वर्षा, कामधेनु, कल्पतरु जैसी बचत उपहार योजनाएं बंद होने से कई निवेशकों ने पोस्टऑफिस में जमा धन निकालना शुरू कर दिया है। वे बैंकों और शेयर में निवेश कर रहे हैं। इस वर्ष लक्ष्य घटाए
आज की बचत-कल की मुस्कान जैसे नारे अब सरकार को ही रास नहीं आ रहे हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2004-05 में 4200 करोड़ रुपए अल्पबचत करने का लक्ष्य रखा था लेकिन तीन साल बाद 2007-08 में इसे घटाकर मात्र 2 हजार करोड़ रुपए कर दिया है।

अल्पबचत से फायदा
पहले- ब्याज दरें 9.5 से 11 फीसदी, सोने-चांदी के सिक्के, नकद पुरस्कार सहित कारों के उपहार, सुरक्षित निवेश
अब- ब्याज दरें 7.5 से 8 फीसदी, कोई उपहार योजना नहीं, सुरक्षित निवेश विकल्प क्या हैं
बैंक - सावधि जमा पर ब्याजदर- 8.25 से 9.25 फीसदी तक, सुरक्षित निवेश
शेयर - इक्विटी में 30 से 40 फीसदी रिटर्न, निवेश में जोखिम शामिल

अभिकर्ताओं ने मुंह फेरा
कोटा जिले में दो साल पूर्व करीब 1100 बचत अभिकर्ता थे जो अब घटकर 840 रह गए हैं। इनमें से अधिकृत एजेंट मात्र 238 ही हैं। इन्हें आवर्ती जमा में 4 प्रतिशत और शेष योजनाओं में मात्र एक फीसदी कमीशन मिलता है, जबकि म्यूच्अल फंड में कमीशन 20 से 30 फीसदी तक मिल रहा है। कोचिंग संस्थानों ने निवेश रोका
प्रोत्साहन स्कीम बंद होने और बैंक ब्याज दरें बढ़ने से कोटा के प्रमुख कोचिंग संस्थानों ने अल्पबचत योजनाओं में करीब 2 करोड़ रुपए के सालाना निवेश को वापस ले लिया है।

काउंसलर कियोस्क खोले जाएं
* अल्पबचत योजनाओं में निवेश सुरक्षित रहता है लेकिन आजकल शेयर और म्युच्अल फंड में रिटर्न इतना ज्यादा है कि रिस्क फेक्टर सेकंडरी हो गया है। बचत योजनाओं में घटता निवेश चिंता का विषय है। सरकार को फिर से उपहार योजनाएं शुरू करना चाहिए। हर कॉलोनी में काउंसलर कियोस्क खोले जाएं जिससे निवेशक योजनाओं के बारे में जानकारी ले सकें। फाइनेंस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि प्रोत्साहन के बिना कोई योजना सफल नहीं हो सकती है।
- डॉ.सतीश जैन, व्याख्याता,वित्त एवं अर्थशास्त्र, कॉमर्स कॉलेज

ब्याज दरों का असर
* बैंक ब्याज दरें बढ़ने का प्रतिकूल असर अल्पबचत योजनाओं में होने वाले निवेश पर पड़ा है। कई निवेशक म्युच्अल फंड में पैसा लगा रहे हैं। प्रोत्साहन स्कीम बंद करने का निर्णय सरकार का है।
- छाया भटनागर, निदेशक, अल्पबचत,राजस्थान

पुनर्निवेश में भी कमी आई
* प्रोत्साहन स्कीम के बंद हो जाने से पुनर्निवेश में कमी आई है, इसकी भरपाई के लिए विभाग की ओर से प्रत्येक एजेंट को माह में 50 हजार रुपए का नया व्यवसाय करने का लक्ष्य दिया है।
- दीपिका मित्तल, उपनिदेशक, अल्पबचत

केस 1. मैं हर साल राष्ट््ररीय बचत योजनाअंो में निवेश करता आ रहा हूं लेकिन दो साल से उपहार योजनाएं बंद होने से सोने-चांदी के सिक्के मिलना बंद हो गए हैं। बैंक में एफडीआर पर 9.25 फीसदी ब्याज मिल रहा है, जो पोस्ट आफिस में नहीं मिलता है। इस साल दीवाली पर राष्ट््ररीय बचतपत्र लेने का विचार छोड़ दिया है।
- रवि कसांडिया, बर्तन व्यवसायी

केस 2. मैने एनएससी की परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद मिले 20 हजार रुपए को बैंक में तीन साल के लिए फिक्स डिपॉजिट करा दिए हैं। बचत योजनाओं मे पैसा 5 साल के लिए ब्लॉक हो जाता है। शेयर सूचकांक में चल रही तेजी को देखते हुए बचत का कुछ हिस्सा इसमें भी निवेश किया है।
- अरविंद, गैस व्यवसायी





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