अभिमत. विदेशी निवेशकों और बेनामी पी-नोट पर नियंत्रण के सेबी के मंसूबे का मकसद था कि विदेशी मुद्रा के प्रवाह को कम किया जाए। सेबी की पहल का असर दिखाई भी दे रहा है। एफआईआई की शुद्ध खरीदी लगातार घटी है।
सोमवार को जब सेंसेक्स ने 734 अंक की रिकार्ड उछाल भरी तब भी एफआईआई की खरीदी एकतरफा नहीं थी। जहां एफआईआई ने 688.93 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदी की है, वहीं घरेलू निवेश संस्थाओं ने भी 634.44 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदी की।
वास्तव में एफआईआई पिछले कुछ दिनों से शुद्ध बिकवाल बन गई थीं और घरेलू संस्थाओं की कीमत पर भारतीय बाजार से निकलने की कोशिश कर रही थीं लेकिन उनके पास निवेश के और विकल्प हैं भी कहां? चीन के शेयर बाजार का पीई अनुपात 60 से ऊपर चल रहा है। भारत का पीई अनुपात 25 है।
ब्राजील और रूस के शेयर बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजार आज भी ज्यादा आकर्षक है क्योंकि कंपनी जगत ने रुपए की मजबूती और ऊंची ब्याज दरों के बावजूद दूसरी तिमाही के शानदार नतीजे दिखाए हैं। बैंकों ने होम लोन व अन्य रिटेल लोन की दरों में कमी की है।
हालांकि रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों में कमी के कोई संकेत नहीं हैं, बल्कि विदेशी मुद्रा का प्रवाह बना रहता है तो सीआरआर में वृद्धि की जा सकती है। फिर भी ब्याज दरों में कमी का सीधा फायदा रीयल इस्टेट और उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में इजाफे के रूप में होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के ज्यादातर बुनियादी घटक मजबूत होने के कारण शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला ऐसे दौर में है जहां भविष्य में तेजी देखने वालों की कमी नहीं है। अगला सप्ताह काफी निर्णायक कहा जा सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगर ब्याज दरों में कटौती करता है, तो विदेशी धन का प्रवाह भारत की ओर तेज हो जाएगा। जहां तक साधारण निवेशकों का सवाल है, जोखिम लेने की अपनी ताकत का अंदाज उन्हें ही सबसे बेहतर हो सकता है। इस मौके पर सतर्कता मूलमंत्र है।