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‘ऑपरेशन कलंक’ की छाया और मोदी की सेहत

आलेख. तहलका का स्टिंग ‘ऑपरेशन कलंक’ टेलीविजन के इतिहास में अब तक दिखाए गए कार्यक्रमों में सबसे लोमहर्षक है। टीवी चैनल ‘आजतक’ और ‘हेडलाइंस टुडे’ ने इसे तफसील से दिखाया है। स्टिंग ऑपरेशन में ऐसे लोग दिखाए गए - जो दिख तो निश्चित ही मनुष्यों की तरह रहे थे लेकिन गुजरात नरसंहार को लेकर उनकी बर्बरता के किस्से रोंगटे खड़े कर देने वाले थे।

वे बता रहे थे कि किस तरह उन्होंने एक गर्भवती महिला का पेट चीरकर अजन्मे बच्चे को मसल दिया। वे यह गर्वपूर्वक बता रहे थे कि किस तरह कांग्रेस के सांसद रहे एहसान जाफरी का तबीयत के साथ कत्ल किया गया। पांच या छह लोगों ने जाफरी को पकड़ा, और तलवार से उनके बाजू काट दिए। फिर एक-एक करके शरीर के विभिन्न अंग काटे। जिस्म के टुकड़े-टुकड़े करने के बाद आग लगाकर जला दिया।

दरिंदगी की यह दास्तान बताने वाला और कोई नहीं बजरंगदल का कार्यकर्ता बाबू बजरंगी है, जो यह भी बता रहा था कि उसे यह सब करते हुए खुद के महाराणा प्रताप होने सा अनुभव हो रहा था। गुजरात के 2002 के दंगों के बाद जिस किसी ने वहां के घटनाक्रम पर नजर रखी होगी उसके लिए निश्चित ही यह कोई नई खबर नहीं है। बस इसमें नया इतना ही है कि दरिंदगी की दास्तान सीधे उन्हीं के श्रीमुख से सुनने को मिली जो उसे अंजाम देने वाले थे।

हमारे देश के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या हो सकता है? आज 2007 में ये स्वघोषित हत्यारे सड़कों पर खुले आम घूम रहे हैं, पांच साल बीतने को आए कानून की पकड़ से अछूते हैं। अहमदाबाद का पुलिस कमिश्नर बाबू बजरंगी और उसके दंगाई साथियों से कहता है कि नरोदा पटिया से आठ सौ लोगों की लाशों को एक जगह दफनाने की बजाय अहमदाबाद में यहां-वहां रफा-दफा कर दे नहीं, तो एक साथ इतनी लाशें मिलने से पुलिस के लिए समस्या खड़ी हो सकती है।

क्या यह शर्मनाक नहीं है? क्या यह और भी शर्मनाक नहीं हो जाता कि यह हिंसा नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली गुजरात सरकार द्वारा प्रायोजित थी? यह सभी जानते हैं कि गोधरा की घटना से लेकर आखिर तक गुजरात की सरकार पूरी तरह शामिल रही, शूरवीर दंगाई तो यह कहते हुए दिखाए गए कि मोदी ने उन लोगों को कुछ भी करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी थी।

वे ये भी बताते हैं कि सैंकड़ों लोगों की हत्या के बाद जब नरेंद्र मोदी नरोदा पटिया के दौरे पर गए तो दंगाइयों का आभार व्यक्त करते हुए किस तरह कहा कि ‘आप धन्य हो’। यह भी बताया गया कि मोदी ने बाबू बजरंगी को किस तरह पनाह दी, माउंट आबू के गुजरात भवन में चार महीने तक छिपाए रखा या फिर बजरंगी को जमानत मिल सके इसके लिए दो-दो जजों का तबादला कर दिया।

इस खुलासे के बाद भी नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हैं, क्योंकि भाजपा उन्हें ही उपयुक्त मानती है और भविष्य में भी मुख्यमंत्री ही देखना चाहती है। स्वघोषित सत्यनिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी हाल ही तक खुद को नरेंद्र मोदी का संरक्षक बताते आए हैं। और अरुण जेटली साहब हैं कि मोदी में देश के भावी प्रधानमंत्री की छवि देखते हैं।

यह भी शर्मनाक है कि सरकार के होते हुए एक एनजीओ मामले को अदालत तक ले जाने की पहल करता है ताकि दोषियों को सजा मिल सके। और हमारी सर्वोच्च अदालत है जिसके पास इस बात की सुनवाई के लिए तो समय है कि किस फिल्म को नेशनल अवार्ड मिलना चाहिए, लेकिन एनजीओ की गुहार सुनने के लिए नहीं। गुजरात के दंगों का सच एक पत्रिका खोज कर निकालती है, क्या यह कानून का पालन करवाने वाली एजेंसियों का कर्तव्य नहीं कि वे यही काम करते?

यह आश्चर्य की बात है कि गुजरात में एक मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मानवता के साथ की गई नृशंसता, सोचने-समझने वाले लोगों के रोष का कारण नहीं बन सकी। घटना के कुछ अर्से बीते नहीं कि देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों ने गुजरात का आतिथ्य स्वीकार करते हुए इसे उद्योगों के लिए सबसे अनुकूल और आदर्श राज्य घोषित किया। क्या यह भी कम अफसोसनाक नहीं है कि गुजरात की घटना पर हमसे ज्यादा रोष यूरोप के देशों ने व्यक्त किया। अमेरिका ने तो मोदी को वीजा देने से मना करके इजहार भी कर दिया।

तहलका के खुलासे के बाद भी उन लोगों में शर्म के भाव आने या यहां-वहां छुपने की बजाय जश्न का माहौल शुरू हो गया है। इन दंगाई शूरवीरों को पूरा यकीन है कि मोदी के रहते हुए उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता। और इस सबके बावजूद यदि दिसंबर के चुनाव में मोदी की पार्टी फिर चुन ली जाए, तो आश्चर्य भी नहीं।

-लेखक वरिष्ठ टिप्पणीकार हैं।





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आपके विचार
krishna
Tuesday, 30th Oct 2007, 10:45
The persons who is roaring on the death of minorities are shamless and awkword persons, because they have not seen the actual situation of the Gujarat before 2002.In India all illigal work are completing by the community. They are authorise to built moseque at the centre of the road or in premises of Rly. Bus and public place. They have got the permission of illigal work. This is the main thing which is behind the post Godhra accident.Where there is a minority community in minority they are not doing such act due to fear, but where there they are in majority they are doing such act.Because they have a capacity of children growth (two in one and half year). In my veiw there is nothing happened except the accident of 2002. Think about the development not on the riot.
RaM Kumar
Tuesday, 30th Oct 2007, 12:18
Please write something on Godhra Kaand, probabaly writer forget that after this Kand, modi won and become CM. Why everybody write about hindus, why don u write about muslims.
ved prakash
Tuesday, 30th Oct 2007, 15:08
WHY DID NOT YOU MENTIONED THE BRUTAL INCIDENT OF KAR SEVAK'S CRUEL MURDER BY THE MUSLIMS.PLEASE GIVE ME THE ANSWER : WAS THAT MURDER JUSTIFIED ?