News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के 37 पदों पर जिन दावेदारों की नियुक्ति की गई है, उनमें छह यहीं के प्रोफेसरों के बेटे-बेटियां हैं। गड़बड़ी का संदेह इसलिए भी हो रहा है कि आदेश गुपचुप जारी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कुलपति डा. सीआर हाजरा का दावा है, चयन नियमानुसार हुआ है, गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।
विश्वविद्यालय ने पिछले साल 13 जुलाई को असिस्टेंट प्रोफेसर के 37 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। सालभर बाद अप्रैल में दावेदारों का साक्षात्कार हुआ। कुलपति डा. सीआर हाजरा, डीन डा. बीएस ठाकुर और रजिस्ट्रार केसी पैकरा समेत पांच अन्य इंटरव्यू में बैठे। उसके बाद चयनित दावेदारों की सूची को इसी माह 18 तारीख को प्रबंध मंडल समिति की बैठक में रखा गया।
दिलचस्प यह है कि प्रबंध मंडल की बैठकें रायपुर में होती रही है, लेकिन इस बार बैठक जगदलपुर में रखी गई। सूत्रों का कहना है, विरोध से बचने के लिए ऐसा किया गया। प्रबंध मंडल के अनुमोदन के बाद अब विश्वविद्यालय ने अलग-अलग आदेश भी जारी कर दिया।
इसमें कई विसंगतियों का पता चला है। छह पद विश्वविद्यालय में ही पदस्थ प्रोफेसरों के रिश्तेदारों को दिए जाने से संदेह बढ़ गया है। बताते हैं, हार्टिक्लचर के सीनियर साइंटिस्ट की पत्नी रेखा सिंह का चयन हुआ है। उनकी पदस्थापना होम साइंस विषय के लिए कृषि विज्ञान केंद्र महासमुंद में की गई है।
दावेदार खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, पर दबी जुबान उनका कहना है कि इसी पद के लिए नेट और पीएचडी होने के बावजूद डा. निवेदिता पाठक का चयन नहीं हुआ। इसी विषय में विवि के प्रशासनिक अधिकारी एनएस पटेल की बेटी मनीषा चौधरी को सलेक्ट किया गया है।
रिसर्च सर्विस डायरेक्टर डा. आरबी शर्मा के पुत्र गौरव शर्मा को हार्टिकल्चर विषय में बिलासपुर में नियुक्ति दी गई है। उनकी पीएचडी पूरी नहीं हुई है। इसी पद के लिए गोल्ड मेडलिस्ट, पीएचडी, नेट और 12 साल का अनुभव रखने वाले नरेंद्र अग्रवाल को मायूस होना पड़ा। इसी तरह सेवानिवृत प्रोफेसर के रिश्तेदार सुनील भंडारकर को मृदा विज्ञान में चुना गया है।
इसी विषय के लिए चयनित तीरथ साहू एक और अफसर के करीबी बताए जा रहे हैं। नियुक्ति में बाहर के लोगों को भी मौका दिया गया है। उनकी तुलना में इसी विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले छात्रों को तरजीह नहीं दी गई। मृदा विज्ञान में सामान्य वर्ग से पंतनगर के आनंद चौबे को चुना गया है। पश्चिम बंगाल के मृत्युंजय मंडल, औरंगाबाद के खोजरे अजीत संतराम सिंह, मध्यप्रदेश (महू) के बीए कुजूर का चयन हुआ है।
विकलांग को आरक्षण नहीं
असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों में छह प्रतिशत पद विकलांग के लिए आरक्षित थे। इस वर्ग में किसी की नियुक्ति नहीं की गई। विवि के कुलसचिव केसी पैकरा का कहना है कि किसी भी विकलांग ने आवेदन नहीं किया। जबकि मृदा विज्ञान विषय में उमेश कुमार ने आवेदन किया था। बताया जाता है कि ओबीसी के इस उम्मीदवार को सामान्य केटेगरी में रख दिया गया।
नियमानुसार विकलांग का साक्षात्कार अलग होना था, लेकिन उसके विकलांग प्रमाणपत्र को देखा ही नहीं गया। साक्षात्कार में विरोध करने के बाद छात्र का नाम विकलांग कोटे में डाल दिया गया। पर चयन सूची में किसी विकलांग का नाम नहीं है।
सूची अभी तक गोपनीय
विवि ने सूची का सार्वजनिक प्रकाशन नहीं किया है। चयनित उम्मीदवारों को अलग-अलग नाम से आदेश जारी किए गए हैं ताकि उन्हें दूसरे चयनित अभ्यर्थियों के नाम मालूम न हो सके।
>> विवि आटोनामस बाडी है। वह स्वयं भर्ती करता है। यदि अनियमितता की शिकायत मिली तो पहले काउंसिल से रिपोर्ट मंगाएंगे। उसके बाद विभाग जांच कराएगा।
—सरजियस मिंज, प्रमुख सचिव कृषि