इंदौर. भागीरथपुरा में नन्स पर हमले के बाद कांग्रेस और ईसाई समाज ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है जिसके चलते मामला गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। कुछ साल पहले हुए झाबुआ के नन कांड के बाद पहला मौका है जब मालवा की किसी घटना पर केरल तथा तमिलनाडु में भी व्यापक प्रतिक्रिया हुई है। पीड़ित नन्स से मिलने आर्कबिशप ऑफ इंडिया भी इंदौर आ सकते हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष यादव सोमवार को नन्स से मिले। फिर एक प्रतिनिधिमंडल के साथ आईजी राजेंद्रकुमार से मिलने पहुंचे। श्री यादव का कहना था सरकार के संरक्षण में हिंदूवादी संगठन ईसाई मिशनरियों पर लगातार हमले कर रहे हैं।
साढ़े तीन साल में ऐसी 47 घटनाएं प्रदेश में हो चुकी है। प्रभावितों को पुलिस संरक्षण मिलना तो दूर थाने में प्राथमिकी भी आसानी से दर्ज नहीं होती। भागीरथपुरा की घटना में भी पुलिस महानिदेशक आनंदराव पंवार के निर्देश के बाद बाणगंगा थाने पर बमुश्किल प्रकरण दर्ज हुआ।
पुलिस पर बेबुनियाद आरोप
>> नन्स की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। उस समय मौके की स्थिति देखते हुए पुलिस ने जो कार्रवाई की उचित थी।
अंशुमान यादव, एस.पी
थाने पर नाम पते लिखकर रवाना कर दिया
पीड़ित नन्स तथा ईसाई समाज के प्रतिनिधियों ने श्री यादव को बताया 25 अक्टूबर की रात वे प्रार्थना के बाद जा रही थी तब कुछ लोगों ने गाड़ी से उतारकर बुरी तरह पीटा और मारते हुए भागीरथपुरा पुलिस चौकी ले गए। इस दौरान कपड़े फाड़ने के प्रयास हुए। चौकी पर मौजूद स्टाफ भी उनके सामने असहाय था।
उन्होंने फादर थामस से कहा वे नन्स को लेकर बाणगंगा थाने पहुंचे। वहां भी पुलिसकर्मियों ने एफआईआर लिखने तथा मेडिकल के लिए भेजने के बजाय नाम-पता लिखकर रवाना कर दिया। समाज ने हमले के विरोध में गांधी प्रतिमा पर धरना देने की घोषणा की तो अफसरों ने दबाव बनाया कि ऐसा न हो।
विधायक अश्विन जोशी व शहर अध्यक्ष प्रमोद टंडन ने कहा हिंदूवादी संगठन पुलिस पर इस कदर हावी है कि जिन नन्स को बुरी तरह पीटा, उनके सिर, पांव तथा शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं, दुराचरण की कोशिश हुई, उनके खिलाफ ही धर्मान्तरण का मुकदमा दर्ज हो गया। प्रतिनिधिमंडल में मनोहर बैरागी, कृपाशंकर शुक्ला, ललित जैन, रामलाल यादव, के.के.मिश्रा, छोटे यादव और राजेश चौकसे शामिल थे।