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एयरपोर्ट के पास 200 एकड़ भूमि आवंटित

भोपाल. पांच सौ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले भारतीय विज्ञान शिक्षा शोध संस्थान (आईआईएसईआर) के लिए जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट के पास दो सौ एकड़ जमीन आरक्षित की है। यह जमीन अभी सेना के कब्जे में हैं, वह इसे वापस करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दे चुका है। रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने के बाद यह जमीन जिला प्रशासन को मिलेगी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की योजना के लिए गांव बैरागढ़ पीपलनेर में यह भूमि आरक्षित की गई है। मंत्रालय ने आईआईएसईआर की स्थापना के संबंध में एक प्रस्ताव भेजा था।

इस प्रस्ताव पर जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। सेना को दो सौ एकड़ जमीन जिला प्रशासन को वापस करना है। यही जमीन आईआईएसईआर के लिए आरक्षित की गई है। जिला प्रशासन ने सेना को चार सौ एकड़ भूमि दी थी। इसमें से 130 एकड़ एयरपोर्ट के काम आ रही है। 80 एकड़ जमीन एयरपोर्ट विस्तार के लिए उपयोग होनी है।

इससे लगी दो सौ एकड़ भूमि भी सेना के पास है, लेकिन एयरपोर्ट के कारण वह उसके लिए अनुपयोगी सिद्ध हो रही है। यही कारण है कि सेना यह जमीन वापस कर रही है, लेकिन अब तक इसे जिला प्रशासन को नहीं सौंपा गया है। कलेक्टर आरके मिश्रा ने बताया कि इसकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। केवल केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की एनओसी का इंतजार किया जा रहा है।

जिला प्रशासन ने आरक्षण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। सेना को उसके द्वारा वापस की गई जमीन के स्थान पर 401 एकड़ जमीन दी गई है। इसमें 133 एकड़ सरकारी भूमि और 267 एकड़ निजी भूमि शामिल है। बरखेड़ा गोंदर में 221 एकड़ और मीरपुर में करीब 47 एकड़ निजी जमीन अधिग्रहीत की गई है। इसका भूअर्जन हो चुका है और किसानों को अवार्ड भी पारित किया जा चुका है।

क्या होगा आईआईएसईआर में
आईआईएसईआर में विज्ञान से संबधित पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे व शोध का काम होगा। इसमें भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, रसायन विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान आदि पाठ्यक्रम होंगे। संस्थान में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट व शोध करने वाले लगभग दो हजार विद्यार्थी और दो सौ संकाय सदस्य होंगे। दो सौ एकड़ क्षेत्र में इंस्टीट्यूट के साथ मेडीकल सेंटर, अतिथिगृह, बैंक, पोस्ट आफिस, स्कूल, मकान आदि बनाने की योजना है।

प्रदेश का फायदा
इस संस्थान के खुलने से प्रदेश को काफी फायदा पहुंचेगा। यहां की प्रतिभाओं को मौका मिलेगा। एक बात निश्चित करनी चाहिए कि संस्थान में प्रदेश के लोगों को शामिल किया जाए। इसमें प्रवेश के लिए होने वाले टेस्ट में बाहर के ज्यादा लोग चयनित होंगे, तो प्रदेश के लोगों को नुकसान होगा। इस संस्थान का स्तर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इसमें पढ़ाने वाले कौन हैं। जब पढ़ाने वाले अच्छे होंगे, तो शिक्षा का स्तर भी अच्छा होगा।

>> भोपाल के लोगों को अच्छी पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों या विदेश नहीं जाना होगा। ऐसे संस्थानों में मुख्य रूप से भौतिकी, रसायन, इजीनियरिंग आदि के शोध पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। पांच साल में एक भी शोध सफल हो गया, तो यह गर्व का विषय होगा। परंतु सभी अच्छी चीजों के लिए समय लगता है, इस संस्थान के परिणाम देखने के लिए दस साल का इंतजार करना होगा।
एके ग्वाल, विभाग प्रमुख, भौतिकी, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय

मंडीदीप में 207 करोड़ करोड़ का निवेश
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद भोपाल के नजदीक औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में तीन इकाइयों में 207 करोड़ रुपए के नए निवेश की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सोमवार को भास्कर इंडस्ट्रीज के 75 करोड़ रुपए के डेनिम निर्माण कारखाने के विस्तार का शिलान्यास किया।

क्या क्या होगा
भौतिकी, जीव, रसायन, पदार्थ विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, गणित आदि पाठ्यक्रम होंगे।
अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट व शोध करने वाले दो हजार विद्यार्थी और दो सौ संकाय सदस्य होंगे।





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rajat
Tuesday, 30th Oct 2007, 12:22
Nothing much is being done to improve inductrial climate in bhopal. While Tamil Nadu has over a dozen SEZ all over the state no SEZ are there in MP in BhOPAL GWALIOR. Even a decent airport is there in bhopal and gwalior to connect to bangalore hyderabad chennai kolkata. It's frustrating.
Himanshu
Wednesday, 31st Oct 2007, 14:29
Will the MP Govrnment be able to attract IT sector to Bhopal some day. There are thousands of IT professionals like me who wants to come back to there home town. Moreover, will the government ever be able to protect and market the Cultural and natural heritage our state has.