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मेरा चांद मुझे आया है नजर

बिलासपुर. महिलाओं के सौभाग्य का त्योहार करवाचौथ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अलग-अलग समाज की महिलाओं ने पारंपरिक ढंग से यह त्योहार मनाते हुए पति के सुखी व सुदीर्घ जीवन की मंगल कामना की। घरों में आज सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया, जो रात तक चलता रहा। करवाचौथ को लेकर चल रही तैयारी आज शाम तक जारी रही।

कल जहां सजने-संवरने के लिए ब्यूटीपार्लरों में भीड़ लगी रही, वहीं आज पूजा की तैयारियां चलती रहीं। नौकरीपेशा महिलाओं को छुट्टी न मिलने की वजह से कुछ दिक्कतें हुईं। भले ही आज महिलाओं ने सारा दिन निर्जला व्रत रखा, लेकिन उनके चेहरे की चमक बरकरार रही। मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने सुबह नहा-धोकर भगवान गणोश की पूजा की। पाटे में गणोश जी की मूर्ति रखकर मिट्टी के करवों में गेहूं, शक्कर, दक्षिणा रखकर आरती की।

शाम को गेहूं के 14 दाने, जल और पकवान बनाकर चांद के दिखने पर पूजा की गई। सिंधी समाज की महिलाओं ने सुबह 4 बजे से उठकर सरगी खाकर व्रत रखा। सरगी खीर का प्रसाद होता है, जो सास अपनी बहू को भेजती है। करवाचौथ के लिए सुबह से ही तैयारियां चलीं। पूजा में भोग लगाने के लिए काले तिल के लड्डू बनाए गए।

रात में गुरुद्वारे जाकर महिलाओं ने पूजा की। आटे के दिए बनाकर मिठाई, काले तिल के लड्डू, फल आदि का भोग लगाया। गणोश की पूजा और करवाचौथ की कथा का पाठ किया। घर वापस आकर चांद दिखने पर महिलाओं ने अध्र्य देकर पति की आरती की और पूरी सब्जी मिठाई, लड्डू से अपना व्रत तोड़ा।

पंजाबी समाज की महिलाओं ने हर साल की तरह इस साल भी दयालबंद के शीतला मंदिर के समीप श्री गांधी के बाड़े में मिलकर करवाचौथ की पूजा की। यहां दोपहर 3 बजे से रात के 9 बजे तक 500 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया। इस पूजा में गौरा-गौरी को बीच में पाटे पर रखकर चारों ओर गोल घेरा बनाकर कथा सुनते हुए पूजा की थालियों के फेरे लगाए।

फल, मिठाई, मेवे का भोग लगाकर माथा ठेका। यहां करवाचौंथ की कथा 80 वर्षीय शांति मासी से सुनी जाती है जो पिछले 40-50 वर्षो से सुहागिन महिलाओं को पूजा कराती हैं। करवाचौथ का व्रत रखने वाली रंजीत कौर बताती हैं कि उन्होंने रात 3 बजे से उठकर नहा धोकर पूजा की। उसके बाद फेनिया खाकर व्रत रखा। सारा दिन निर्जला व्रत रखकर रात में पूजाकर चांद निकलने अध्र्य देकर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत तोड़ा।

वार्ड क्रमांक 35 की पार्षद पूजा जिवनानी ने भी सुबह 4 बजे से उठकर सरगी खाकर व्रत रखा। वह बताती हैं कि शाम को सारी महिलाएं मिलकर पूजा करती हैं और घर लौटकर चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं। इसी तरह रामनगर वार्ड की पार्षद रीता देवी गुलहरे ने काम पर रहते हुए अपना व्रत रखा। वह कहती हैं कि जिस व्रत से घर परिवार की खुशी जुड़ी है उसे रखने में परेशानी नहीं होती चाहे भले ही उसमें काम बीच में ही क्यों न आ जाए।

आड़े नहीं आती दूरियां
एक ओर जहां महिलाओं ने चांद निकलने पर अपने पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से पानी पीकर व्रत तोड़ा, वहीं रविन्दर कौर छाबड़ा को अपने पति की तस्वीर देखकर व्रत तोड़ना पड़ा। विनोबा नगर में रहने वाली रविन्दर कौर की शादी को भले ही 13 साल को गए हैं। श्रीमती कौर के पति पिछले 2 वर्ष से लंदन में रह रहे हैं।

यह दूसरा साल है, जब उन्होंने एक दूसरे के बिना करवाचौथ का व्रत रखा। श्रीमती कौर बताती हैं कि यह व्रत वह अकेले नहीं रहतीं, उनके पति भी इसमें साथ देते हैं। आज सुबह 4 बजे से उठकर उन्होंने भी सरगी खाकर व्रत की शुरुआत की और रात में चांद निकलने पर फोन पर बातें करते हुए पूजा की। रात में इंटरनेट पर बातें कर वह व्रत तोड़ो।





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