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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. एक मूर्तिकार जब पत्थर पर अपनी कल्पना के जरिए एक कृति को जन्म देने की कोशिश करता है, लेकिन समाज में विरोधी ताकतें उसका विरोध करती हैं। कभी उसे इस काम से रोका जाता है तो कभी उसके हाथ से हथौड़ी छीन ली जाती है। विरोध के दौर में निराशा भी उसे घेरती है, लेकिन वह हिम्मत नहीं हारता। हालांकि कभी यही ताकतें अकेले तो कभी सामूहिक रूप से उसे परेशान करती हैं। आखिर में ये ताकतें उससे जीत जाती हैं। इसी तरह कुछ लोग मछलियां पकड़ने बैठे हैं, लेकिन दूसरे लोग उनके इस काम में बाधा डालते हैं, आखिर में कुछ लोग उन दूसरे लोगों से जीत हासिल कर ही लेते हैं।
जिंदगी जीने का नाम है न कि खोने का..। जिंदगी में सब कुछ हासिल किया जा सकता है, लेकिन हासिल करने के लिए देखे गए सपनों को हकीकत में ढालने की हिम्मत होनी चाहिए। पीयू में सोमवार शाम को मंचित नाटक ‘ड्रीम्ज एंड बियॉन्ड’ यही बताता है।
पीयू के डिपार्टमेंट ऑफ इंडियन थिएटर की ओर से इस नाटक का मंचन पीयू में चल रही दो दिवसीय नॉर्थ जोन वाइस चांसलर्स मीट-2007 में आए मेहमानों के लिए किया गया। इन नाटक का निर्देशन डिपार्टमेंट के चेयरमैन प्रो. महेंद्र कुमार के साथ श्वेता ने किया। नाटक में अभिनय के साथ नृत्य संयोजन, लाइट और मेकअप के साथ ही डिजाइनिंग कमाल की थी। महेंद्र कुमार के निर्देशन में मंचित इस नाटक में पात्रों के मुंह पर मुखौटों का सार्थक प्रयोग किया गया। इस नाटक में कोशलेश, अमित, अजीत, गौरव, रीमा, राजेश अनूप और अभिषेक ने शानदार अभिनय किया।
स्टूडेंट्स ने इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट की ओर से हमेश ही बेहतरीन नाटकों के मंचन की रिवायत को जिंदा रखते हुए 40 मिनट के इस नाटक को मेहमानों के लिए स्मरणीय बना दिया।