बीकानेर.
राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान संस्थान (एनआरसीसी) में अब मेवाड़ ऊंट भी शामिल होंगे। संस्थान के वैज्ञानिक मेवाड़ी ऊंट खरीदने के लिए 30 अक्टूबर को चित्तौड़ व उदयपुर के लिए रवाना होंगे। ब्रीड में कोई कमी नहीं हो इसके लिए एनआरसीसी ने एक कमेटी गठित की जिसमें पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को भी शामिल किया है।
फिलहाल संस्थान 11 मेवाड़ी ऊंटों की खरीद करेगा जिसमें आठ मादा व तीन नर शामिल हैं। संस्थान में अब तक जैसलमेरी, बीकानेरी व कच्छी ऊंट ही थे। बताया जाता है कि संस्थान कैमल मिल्क प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिहाज से मेवाड़ी ऊंटों की खरीद कर रहा है।
अन्य ऊंटों की नस्ल के मुताबिक मेवाड़ी ऊंटनी में मिल्क प्रोडक्शन क्षमता अधिक होती है। इसके अलावा कैमल रिसर्च के लिए एक कूबड़ वाली सभी ब्रीड होनी चाहिए। इसलिए अब ऊंटों की चारों प्रमुख नस्लें भी यहां मौजूद रहेंगी। वैसे देश में आठ प्रकार की ऊंटों की नस्लें बताई जाती हैं लेकिन वैज्ञानिक आधार पर सिर्फ चार नस्लों को भी परखा गया है। इनमें मेवाड़ी, कच्छी, जैसलमेरी व बीकानेरी ऊंट शामिल हैं।
मिल्क प्रोडक्शन के साथ संस्थान मेवाड़ी ऊंटों पर अनुसंधान कार्य भी करेगा। अब तक यह ब्रीड नहीं होने के कारण अनुसंधान कार्यो में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन अब इसकी समस्या दूर की जा रही है।
एनआरसीसी के निदेशक डॉ.के.एम.एल.पाठक ने बताया कि संस्थान में दो सौ से अधिक ऊंट हैं लेकिन इनमें एक भी मेवाड़ी ऊंट प्रजाति नहीं थी। राष्ट्रीय स्तर के संस्थान के लिए यह ठीक नहीं है इसलिए इन ऊंटों को खरीदा जा रहा है।
इसके अलावा अनुसंधान व मिल्क प्रोडक्शन के लिए भी उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल तो मेवाड़ी ऊंटों की संख्या 11 ही रहेगी लेकिन बाद में इन्हीं से संख्या और बढ़ जाएगी।