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सुहाग के लिए तोड़ी परंपरा की जंजीर

करनाल.

जिले के सबसे बड़े गांव गोंदर, उसके पड़ोसी गांव ओंगद व कतलाहेड़ी में 200 बरस से करवा चौथ का पर्व नहीं मनाया जाता। इस बार इन तीनों गांवों में कई सुहागिनों ने पति की सलामती के लिए व्रत रखा और करवाचौथ की कहानी सुनकर व्रत खोले। हां इन्हीं गांवों में चौहान गोत्र की महिलाओं ने व्रत नहीं रखा। वे आज भी पुरानी परंपरा को निभा रही हैं।

कब से नहीं मनाया जाता पर्वदो सौ वर्ष पूर्व करवाचौथ के दिन राहड़ा की एक लड़की ने सपना देखा कि उसके पति को किसी ने मौत के घाट उतार दिया है। वह परिजनों को लेकर गोंदर स्थित ससुराल पहुंची तो देखा कि पति का शव कुएं में पड़ा था। उसी दिन से गोंदर, ओंगद व कतलाहेड़ी गांवों में करवाचौथ पर प्रतिबंध लग गया था। ओंगद के बुजुर्ग ओमप्रकाश का कहना है कि संयुक्त परिवार टूट गए हैं। नई नवेली दुल्हनें परंपरा को नहीं मान रहीं। गोंदर गांव के पूर्व सरपंच रकम सिंह राणा का कहना है कि उनके परिवार में इस पर्व को अभी भी नहीं मनाया जाता, हां दूसरी जातियों के यहां इस पर्व को अब मनाया जाने लगा है।

सोनिया ने करवा चौथ मनायाअम्बाला. अम्बाला सेंट्रल जेल में फांसी की सजा का इंतजार कर रही सोनिया सहित 35 महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा। उधर रोहतक जिला जेल में सजायाफ्ता और विभिन्न मामलों में विचाराधीन 92 महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा, मेहंदी रचाई और चांद का दीदार कर व्रत खोला।

जेल प्रशासन ने महिला कैदियों और बंदियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने खर्चे पर मेहंदी, सुहाग, पूजन और खान-पान की सामग्री मुहैया कराई।





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