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पूंजी प्रवाह:नियंत्रण के लिए नियम जरूरी

नई दिल्ली.chidambaramवित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि भारत को बड़े पैमाने पर पूंजी के अंतप्र्रवाह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसी भी संभावित सदमे को दूर रखने के लिए उचित नियम बनाने के साथ ही रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम की भी जरूरत है।

वित्तमंत्री पी चिदंबरम फॉचरून ग्लोबल फोरम में उद्योग जगत से जुड़े लोगों को संबोधित कर रहे थे। चिदंबरम ने कहा कि आज भारत में सतत पूंजी प्रवाह बना हुआ है। यह हमारे लिए पूरी तरह से एक नई स्थिति है।

उन्होंने कहा कि हम पूंजी का स्वागत करते हैं लेकिन हमें यह भी जानना होगा इस पूंजी को किस तरह मैनेज किया जाए। चिदंबरम ने किसी भी संभावित सदमे के हालात से बचने के लिए उचित नियम बनाए जाने और रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम को बनाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इस साल विदेशी संस्थागत निवेश का आंकड़ा 17 अरब डॉलर के स्तर तक जा पहुंचा है। केवल अक्टूबर माह में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने आठ अरब डॉलर का निवेश किया। उन्होंने कहा कि यूएस फेडेरल रिजर्व द्वारा की रेट में कटौती के कारण पूंजी के प्रवाह में वृद्धि दर्ज की गई।

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जुलाई के बीच 6.6 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में 3.7 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ था। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले साल के 15.7 अरब डॉलर की तुलना में इस वित्तीय वर्ष के दौरान 30 अरब डॉलर विदेशी निवेश पाने का लक्ष्य रखा है।

चिदंबरम ने कहा कि पूंजी के भारी अंतप्र्रवाह के कारण विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 261 अरब डालर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही जनवरी से लेकर अब तक डालर की तुलना में रुपए में12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।





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