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ऐसा है अमेरिकी कल्चर?

पुणे. सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रम के तहत जब 16 वर्षीय निकिता अमेरिका जाने के लिए तैयार थी तब उसकी आंखों में चमक थी और एक कल्चरल एंबेसडर होने का आदर्श भी लेकिन उसे क्या मालूम था कि जब वह तीन महीने बाद पुणे लौटेगी तो उसके जहन में कड़वी यादें और डर के साथ ही हाथ में फ्रैक्चर भी होगा!

शहर के एक स्कूल की छात्रा निकिता धवले अमेरिकन फील्ड सर्विस के सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम में चुनी गई थी। अगस्त के पहले सप्ताह जब वह मिनेस्टा पहुंची तो उसे पाइपस्टोन के उस मेजबान परिवार की क्रूरता का कोई आभास नहीं था जहां उसे इस कार्यक्रम के तहत रहना था।

26 अक्टूबर को किसी तरह से अपना आत्मसम्मान बचाकर भारत वापस लौटी इस किशोरी ने बताया कि उस परिवार ने मेरे साथ नौकरों से भी बदतर सलूक किया। मुझसे किचन और डायनिंग रूम की सफाई, पूरे परिवार के कपड़ों की धुलाई करवाई गई, बर्तन साफ करवाए गए और तो और अस्तबल तक साफ करवाया गया।

डरी-सहमी निकिता ने कहा कि सांस्कृतिक एंबेसडर के नाम पर वो एक घरेलू गुलाम चाहते थे। एएफएस की स्क्रीनिंग के बाद राफ परिवार के साथ रहने वाली निकिता को तब एक और झटका लगा जब दो हफ्ते बाद उस परिवार में एक टीनेज लड़का रेयान भी आ गया। निकिता को पहले इस लड़के के बारे में नहीं बताया गया था।

निकिता ने बताया कि रेयान ने उसके साथ गाली-गलौज तक की और कहा कि उसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सिद्धांत ही बकवास लगता है। इतने गलत व्यवहार के बाद उस परिवार की मुखिया महिला ने कुछेक बार निकिता के साथ हाथापाई भी की। एक बार जब उसने अपने चेक को कैश करने के लिए कहा तो उस महिला ने निकिता को धक्का दे दिया। वहीं, रेयान ने भी जब-तब निकिता पर फब्तियां कसीं।

अस्तबल में काम करते हुए गिर जाने पर निकिता का हाथ फ्रैक्चर हो गया। उस महिला ने निकिता को डॉक्टर को दिखाकर प्लास्टर तो बंधवाया लेकिन उसके बाद कोई ध्यान नहीं दिया। इन सब घटनाओं से घबराने के बाद निकिता के लिए वापस भारत लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।

निकिता ने इन हालात के बारे में पुणे में अपने परिजनों को बताया और दिल्ली में एएफएस की इकाई को भी ईमेल कर वापस लौटने के बारे में आवेदन किया। लेकिन, वहां एएफएस के स्थानीय समन्वयक ने निकिता से कहा कि वह चाहे तो परिवार बदल सकती है लेकिन दूसरा परिवार इससे भी ज्यादा बुरा हो सकता है। उसने निकिता को सलाह दी कि वह इन बातों को हल्के-फुल्के मजाक के तौर पर ग्रहण करे।

निकिता ने साफ तौर पर कह दिया कि मजाक की परिभाषा यह नहीं है और जो विद्यार्थी यहां आते हैं उनके साथ ऐसा बर्ताव बिल्कुल ठीक नहीं है। और तयशुदा 11 महीने के कार्यक्रम के बावजूद 3 महीने बाद ही निकिता उस यातना से मुक्ति पाने के लिए वापस भारत लौट आई।

भारतीयता का अपमान :
निकिता ने रोते हुए बताया कि उस परिवार के साथ रहते हुए उसे ठीक से भोजन भी नहीं नसीब होता था केवल स्कूल में लंच टाइम में उसे अच्छा खाना मिलता था। दो हफ्ते तक निकिता को घर पर सिर्फ ऑमलेट खाने को दिया गया। जब उसने उन लोगों से अमेरिकी तौर-तरीकों और भोजन के बारे में सीखना चाहा तो रेयान ने निकिता से कहा तुम्हें कुछ सिखाना, किसी कुत्ते को कुछ सिखाने जैसा है।

बिदाई भी अपमान के साथ :
जब निकिता को एएफएस के स्थानीय समन्वयक ने यह कह दिया कि वह परिवार बदल सकती है लेकिन यहां सभी परिवार एक जैसे हैं तो निकिता ने घर लौटने का फैसला कर दिया क्योंकि वह यह जिल्लत बर्दाश्त नहीं करना चाहती थी लेकिन उसके समय से पहले लौटने के फैसले को होम सिकनेस करार दिया गया। हालांकि निकिता ने प्रोफाइल में जल्द लौटने की वजह होम सिकनेस लिखे जाने से इंकार किया।





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Sudhir
Tuesday, 30th Oct 2007, 16:06
Such cultural exchanges that subject Indians to such insulting behaviour must be henceforth stopped immediately and protests be registered at the highest levels.
kamlesh kumar sahu
Wednesday, 31st Oct 2007, 6:12
I feel nikita is 100% correct and americans are very rude and impolite. There culture has no generosity, no respect for others. Nikita showed courage and told this to the press. There may be many boys and girls who are tolerating this bad behavior because they have chosen to study in US and now they wish to finish their career. Here in japan, the things are not so bad. General public is polite but laboratory professors are not so polite but, of course, much better than americans.
Tom
Wednesday, 31st Oct 2007, 7:08
To be heal with such dirty culture of american peoples, why should not Indian govt is taking any action.I recommend to stop such exchange immediately,
राजीव, इन
Wednesday, 31st Oct 2007, 10:41
इसे मैं लडकी के माँ-बाप की गलती मानता हुँ. 16 की उम्र में अमेरिका की लगभग हर लडकी अपना कौमार्य त्याग चुकी होती है, यह वहा कि सांस्कृतिक परम्परा है. भगवान की धन्यवाद दे कि लडकी सकुशल वापस लौट आई. ईश्वर उसके माँ-बाप को सद्दबुद्दि प्रदान करें
Alok Malviya
Friday, 2nd Nov 2007, 14:19
There is nothing new in this news because I already have heared from a no. of my friends about such nature of American people. The reason is only their cultural background, and the same english mentality which do think that all the development worldwide is brought only by them and rest all are just foolish people, their business oriented culture teaches them no moral values but only professionalism. Even relations are seen there as only physical relations. They do not understand any 'Saravadharma Samabhava' or cultural harmony gifted to the World by Indians. But Indians need not worry by such events. Future will tell such people what worth we do have. Just be honest and confident We will definitely win the world not by power but by hearts. Long Live India, long live Indians, Ja Hind.
nihit
Friday, 2nd Nov 2007, 14:41
इस विडियो में लड़की ने ऐसा कुछ नही कहा की ये सुलूक सिर्फ़ उसके साथ किया गया | घर की मालकिन अपने बच्चो को भी ऐसे ही झगड़ती थी | इससे ये नही कहना चाहिए की सभी अमेरिकांस ऐसे हैं | ये एक ग़लत फमिली थी |
sanjay Jain
Saturday, 3rd Nov 2007, 12:09
Yeh to bahut Aachha hua ki nikita ki Izzat nahi luti gayi. verna nikita ki jindagi hi ujad jati. mera bhaskar pariwar se request hai ki plz easko mamle ko halke me na le. aapke pass wo takat hai to sarkar badal sakti. eas mamle ko puri dunia me highlight kare. taki amrica me ho rahe sanskratik adan pradan ka yeh khel dunia walo ko pata chal sake.