सिलिकान वेली: एक भारतीय महिला इंजीनियर के पूर्व नियोक्ता से 55 लाख डॉलर(22 करोड़ रुपए) का हर्जाना मिलेगा। उसने इस कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नस्लभेदी व्यवहार के खिलाफ सेन फ्रांसिस्को फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।
फेडरल कोर्ट की ज्यूरी ने किरण पांडे के पूर्व नियोक्ता शेवरॉन को उसे गलत तरीके से नौकरी से निकालने और प्रताड़ित करने का दोषी करार दिया। इसके बाद कोर्ट ने कंपनी को 30 लाख डॉलर किरण का भविष्य खराब करने और 25 लाख डॉलर मानहानि के बतौर उसे देने के आदेश दिए।
भारत में जन्मी किरण ने स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में पीएचडी की है। उसने शेवरॉन ने 15 साल की सेवा के बाद 2003 में नौकरी से निकाल दिया था। ज्यूरी ने सुनवाई के दौरान सितंबर 2000 से लेकर दिसंबर 2003 तक के घटनाकृमों का अध्ययन करने के बाद यह माना कि पांडे द्वारा भेदभाव की शिकायत किए जाने के बाद शेवरॉन ने उसे ही प्रताड़ित करते हुए पब्लिक पॉलिसी का उल्लंघन करने का आरोप लगाकर नौकरी से निकाल दिया।
शेवरॉन ने किरण को 1988 में बतौर इंजीनियर नियुक्ति दी थी। 2001 के बाद उसे उसके सुपरवाइजर ने रेक्स मिशेल के हाथों लगातार नस्लीय भेदभाव का शिकार होना पड़ा। उसने इसके खिलाफ अमेरिका कैलिफोर्निया के उत्तरी जिले की स्टेट जिला कोर्ट में याचिका दायर की थी। 2002 में उसने मिशेल की शिकायत उनसे वरिष्ठ अधिकारी जेम्स जॉनसन से की थी। लेकिन उन्होंने इसकी जांच पड़ताल करना जरूरी नहीं समझा। उलट किरण के सामने ही ग्रुप या फिर कंपनी छोड़ने का विकल्प रख दिया।