कोलकाता.
जिम्मी पाजी उर्फ मोहिंदर अमरनाथ ने किसी समय ठीक ही कहा था कि चयनकर्ता जोकरों का समूह है। राहुल द्रविड़ के साथ जो कुछ हुआ उससे तो यही साबित होता है। यह बात पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी अजय जडेजा ने कही। उन्होंने कहा कि राहुल द्रविड़ को दो मैचों के लिए बाहर रखने का मतलब समझ से परे है। उसी प्रकार वीरेंद्र सहवाग की वापसी अनबूझ पहेली है।
सहवाग ने चैलेंजर सीरीज में एक ही अच्छी पारी खेली, लेकिन उनके बीते रिकॉर्ड की तारीफ की गई। क्या द्रविड़ का बीता रिकॉर्ड सराहनीय नहीं रहा है। अगर लेना ही था तो सुरेश रैना, दिनेश कार्तिक या पार्थिव पटेल को लेते जिनसे भविष्य में उम्मीद की जा सकती है। जडेजा ने कहा कि इस बात का अफसोस है कि चयन का कोई मापदंड नहीं है। कभी सौरव गांगुली उनके लिए बुरे बन जाते हैं तो कभी युवाओं के लिए आदर्श। अब यही खेल राहुल द्रविड़ के साथ प्रारंभ किया गया है।
कोच की आवश्यकता नहींजडेजा का कहना है कि रॉबिन सिंह, वेंकटेश प्रसाद व लालचंद राजपूत मिल कर बढ़िया काम कर रहे हैं। अत: ऐसे में कोच की क्या आवश्यकता है। टीम इंडिया का प्रदर्शन भी संतोषजनक है, अत: विदेशी कोच या अनुभवी देशी कोच की फिलहाल आवश्यकता नहीं है।