हिसार. जहाजपुल स्थित प्राचीन दिगम्बर जैन पाश्र्वनाथ मंदिर नशियां जी में खुदाई के दौरान मंगलवार को 10वीं शताब्दी की सफेद पाषाण से बनी भगवान महावीर, आदिनाथ व पाश्र्वनाथ की मूर्तियां मिलीं। मूर्तियों की सूचना मिलते ही मंदिर में श्रद्धालु एकत्रित हो गए। एक नवंबर को इन मूर्तियों का महामस्तकाभिषेक होगा।
इस जैन तर्ी्थकरों की मूर्तियां मिलने के पीछे खास बात यह बताई जा रही है कि खुदाई के दौरान यहां तीन जेसीबी मशीनें खराब हो गई थी, जिसके कारण मजदूरों से खुदाई करानी पड़ी। पाश्र्वनाथ मंदिर में 40 फुट ऊंचा मान स्तंभ बनना है, जिसके लिए खुदाई का काम किया जा रहा है। खुदाई के दौरान भूगर्भ से सफेद पाषाण से बनी जैन धर्म के 24वें तर्ी्थकर भगवान महावीर व प्रथम तर्ी्थकर भगवान आदिनाथ की 978 वर्ष पुरानी तथा 23वें तर्ी्थकर भगवान पाश्र्वनाथ की 1068 साल पुरानी मूर्तियां मिलीं।
यह खुदाई आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के परमशिष्य संस्कार प्रणोता मुनि सौरभ सागर महाराज की प्रेरणा से मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए की जा रही थी। बताया जाता है कि इन मूर्तियों के बारे में मुनि सौरभ सागर को स्वप्न के माध्यम से पहले ही आभास हो गया था और उन्होंने समाज को अतिशय होने की बात भी कही थी।
मुनिश्री जी ने कहा था कि समाज भक्ति करे, चमत्कार स्वत: होगा। मुनिश्री के अनुसार अभी यहां से और भी जैन मूर्तियां निकलने की संभावना है। मुनिश्री ने इस जगह को अतिशय क्षेत्र घोषित कर दिया है।
मानस्तंभ के शिलान्यास हेतु मुनिश्री तीन दिन के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मंदिर में ही विराजमान हैं। मूर्तियां मिलने से पूरे जैन समाज में खुशी की लहर है। हिसार और आसपास के अन्य शहरों में जैसे ही मूर्तियां मिलने की खबर पहुंची, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मूर्तियों के दर्शनार्थ मंदिर में पहुंचना शुरू कर दिया। पुष्प वर्षा योग समिति के प्रवक्ता वीर प्रसाद जैन ने बताया कि मूर्तियां मिलने के समय समाज के जिनेंद्र जैन, विनोद जैन, प्रवीन जैन, सुभाष जैन, जयप्रसाद जैन एडवोकेट व शशि जैन सहित पूजा में बैठे सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।