एडिनबर्ग. मलेरिया का इलाज कर रहे वैज्ञानिकों को एक नई दिशा मिल गई है। एक नई शोध में पता चला है कि ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों को मलेरिया के घातक प्रभावों जैसे एनीमिया या कोमा का सामना नहीं करना पड़ता।
अफ्रीकन मलेरिया से पीड़ित दो तिहाई लोग मलेरिया के घातक प्रभावों से बच गए क्योंकि उनका ब्लड ग्रुप ओ था। एक वैज्ञानिक के मुताबिक उन्हें इस नई शोध ने ताज्जुब में डाल दिया है। उसका कहना है कि अभी तक किसी ने इस बात पर ही गौर नहीं किया था कि ब्लड ग्रुप का टाइप भी मलेरिया में महत्व रखता है। शोध में पता चला कि टाइप ओ ब्लड ग्रुप रोजेट्स यानी पैरासाइट से घिरे ब्लड सैल्स की ओर नहीं जाते और इस तरह उन्हें धमनियों में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह रोकने से रोक देते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस खोज के बाद दुनिया भर में मलेरिया से होने वाली सालाना दो करोड़ लोगों की मौतों को रोका जा सकता है।
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी को पता चला है कि टाइप ओ खून वाले लोग मलेरिया के घातक प्रभावों से मुक्त रहते हैं। ओ ग्रुप के लोगों में रेड ब्लड कॉर्पस्कल्स उन्हें इससे बचाती हैं। एडिनबर्ग के वैज्ञानिकों, माली औक केन्या के शोधकर्ताओं ने अफ्रीकी बच्चों पर अध्ययन किया। एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ एलेक्स रोव का कहना है कि अब हम इस काबिल हो सके हैं कि सब सहारन अफ्रीका में मलेरिया से मरने वाले बच्चों की तादाद को घटा सकें। यह शोध पीएनएएस जर्नल में प्रकाशित हुई है।