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सभी जन- प्रतिनिधियों से भराएं रिटर्न

अभिमत. आयकर विभाग ने मध्यप्रदेश के 13 मंत्रियों से आय-व्यय का विवरण तलब करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह मंत्रियों और आमजन के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करता है। उसके इस सही कदम की सराहना की जानी चाहिए। दुर्भाग्य है कि जो मंत्री आमजन के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं, उन्हें ही कानून का पालन करने की सुध नहीं रहती और उन्हें संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर कानून के पालन की याद दिलानी पड़ती है। ऐसे मंत्री मध्यप्रदेश ही नहीं, अन्य प्रदेशों में भी आसानी से तलाशे जा सकते हैं। आयकर कानून के तहत आयकर की न्यूनतम सीमा से अधिक आय वाले सभी नागरिकों के लिए रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। ऐसे में मंत्रियों या दूसरे जन-प्रतिनिधियों द्वारा रिटर्न दाखिल नहीं करने का कोई औचित्य नहीं है।

हकीकत है कि देश के आम नागरिकों को मंत्रियों और दूसरे जन-प्रतिनिधियों की जीवन-शैली से रश्क होता है। आज के दौर में सादा और मितव्ययतापूर्ण जीवन जीने वाले मंत्री और जन-प्रतिनिधि दुर्लभ होते जा रहे हैं। ज्यादातर मंत्री और जन-प्रतिनिधि शान-शौकत भरी आडंबरपूर्ण जीवन-शैली के अभ्यस्त होते हैं। ऐसे में उनके द्वारा आयकर रिटर्न नहीं भरे जाने को घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना कृत्य ही कहा जाएगा।

आयकर विभाग को नोटिस देने की यह कार्रवाई केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं रखनी चाहिए। उसे सांसदों से लेकर पार्षदों तक सभी जन-प्रतिनिधियों को नोटिस देकर उनके आय-व्यय का विवरण तलब करना चाहिए और उन्हें आयकर रिटर्न भरने के लिए बाध्य करना चाहिए। ऐसा करने से आयकर विभाग की झोली में कुछ तो इजाफा होगा ही। साथ ही कानून बनाने वालों को उसके पालन का महत्व भी समझ में आएगा।





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