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पेड़-पौधों की कब्र पर बनेगा अप्पूघर

जयपुर. जेडीए ने वन विभाग की आपत्तियों के बावजूद दिल्ली की एक और कंपनी को नाहरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य सीमा के पास 150 हैक्टेयर से ज्यादा जमीन देने appu gharका फैसला किया है। इससे पहले राज्य सरकार ने वन विभाग की आपत्तियों के बावजूद आमेर में दिल्ली की एक अन्य कंपनी मैसर्स बुटीक होटल्स को जमीन का आवंटन किया था।

इंटरनेशनल एम्यूजमेंट लि. नाम की कंपनी को एम्यूजमेंट पार्क के लिए जो जमीन दी जा रही है, राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक उसका मालिक जेडीए है, लेकिन जीटी शीट के हिसाब से यह वन क्षेत्र है। अप्पूघर बनाने के लिए भारी मात्रा में पेड़ काटने होंगे। ये पेड़-पौधे भी वे हैं जो वन विभाग ने 1990 से 1999 तक विभिन्न योजनाओं में केन्द्र और जापान सरकार की सहायता से लाखों रुपए खर्च करके उगाए हैं। शीशम, देशी बबूल, टोर्टलिस, चुरैल, रोंज आदि प्रजातियों के वाले पौधे अब दरख्त बन चुके हैं। इतना घना वन क्षेत्र है कि एक हैक्टेयर में करीब 550 पेड़ हैं। अब यदि ये पेड़ काटे गए तो भविष्य में वन विकास कार्यो के लिए केन्द्र से सहायता लेने में परेशानी आएगी।

इसलिए है वन विभाग को आपत्ति: डीएफओ जयपुर (मध्य) ने 22 फरवरी, 07, फिर संयुक्त निरीक्षण के बाद 17 मार्च, 07 को मुख्य वन जीव संरक्षक को भेजी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि प्रस्तावित क्षेत्र नाहरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमा से बाहर परन्तु वन सीमा से लगा हुआ है। वैसे यह क्षेत्र नाहरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की निरंतरता में आता है। इस क्षेत्र में वन्यजीव बघेरा, लकड़बघा, भेडिया, शियार और नीलगाय अक्सर घूमते रहते हैं और मौका निरीक्षण के दौरान इसके प्रमाण भी मिले हैं। यह इन वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और विचरण तथा प्रजनन क्षेत्र बन चुका है। डीएफओ का यह भी कहना था कि प्रस्तावित क्षेत्र चारागाह भूमि होने से आसपास की मवेशियों का दबाव भी नाहरगढ़ अभ्यारण्य क्षेत्र में बढ़ेगा जो उचित नहीं है। इसलिए अप्पूघर (मेगा ट्यूरिज्म सिटी) को स्थानीय पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अन्यत्र बनाया जाए।

कंपनी को क्या फायदा?
कंपनी को यह जमीन मौजूदा डीएलसी रेट पर दी जाएगी। जेडीए के अनुसार वहां मैन रोड की जमीन की दर 4.50 लाख रुपए बीघा है। जबकि अंदर सवा तीन से पौने चार लाख रुपए बीघा है। बाजार दर वहां 20 से 30 लाख रुपए बीघा है। इस कंपनी को करीब 600 बीघा जमीन दी जाएगी। यदि 15 लाख रुपए प्रति बीघा का मुनाफा भी माना जाए तो कंपनी को 90 करोड़ का लाभ तो जमीन में ही मिल जाएगा।

वन विभाग की अपनी मजबूरी है: प्रधान मुख्य वन संरक्षक अभिजीत घोष का कहना है कि प्रस्तावित का राजस्व रिकॉर्ड में मालिकाना हक जेडीए के पास है। कानूनन हम क्या कर सकते हैं।

प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक आर.एन. मेहरोत्रा का कहना है कि वन विभाग की जमीन तो नहीं दी जा सकती थी। यदि किसी और विभाग की जमीन है तो उसमें वन विभाग क्या कर सकता है। उनकी जानकारी के अनुसार प्रस्तावित भूमि पर प्राकृतिक वन नहीं है। गैर वन भूमि के बारे में निर्णय करने का अधिकार सरकार के पास है।

बीडी की शर्तो पर देंगे जमीन: जेडीए के अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व) बी.के. दोषी ने बताया कि दस-बारह दिन पहले हुई एलपीसी की बैठक में अप्पूघर के लिए जमीन देने का फैसला कर लिया गया है। बीडी से क्लीयरेंस मिलने के बाद ही यह जमीन दी जा रही है। कंपनी को आवंटन-पत्र अभी जारी नहीं किया गया है।

आपत्तियों का क्या हुआ, मुझे पता नहीं: ब्यूरो ऑफ इंवेस्टमेंट प्रमोशन एंड एनआरआई के आयुक्त उमेश कुमार का कहना है कि एम्यूजमेंट पार्क के मामले में वन विभाग की आपत्तियों क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है, क्योंकि यह उनके यहां आने से पहले का मामला है।

अप्पूघर में और क्या-क्या
* मेगा ट्यूरिज्म सिटी के रूप में विकसित होगा क्षेत्र।
* रिटेल शॉप, रेस्टोरेंट, पब्स और फूड कोट्र्स।
* एम्यूजमेंट पार्क, वाटर पार्क, रिसोट्र्स, परिवारिक मनोरंजन केन्द्र।

यहां बनेगा अप्पूघर
अजमेर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्गो को जोड़ने वाले एक्सप्रेस हाइवे के दोनों ओर ग्राम दौलतपुर-कोटडा में अप्पूघर बनाया जाना है। इसके निर्माण में कंपनी 300 से 400 करोड़ रुपए का निवेश करने वाली है।





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