जयपुर. राजस्थान सरकार को अप्रैल से अक्टूबर के बीच महंगी बिजली खरीदने के कारण सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लग चुकी है। यह पहला मौका है, जब
सरकार ने बिजली कंपनियों की मंशा के खिलाफ गर्मियों में बिजली खरीदी, वह भी साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए की। इसकी कीमत भी 7 रुपए 62 पैसे से 8.19 पैसे प्रति यूनिट पड़ी।
जानकारी के अनुसार राजस्थान सरकार ने हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड से पावर ट्रेडिंग कॉपरेरेशन (पीटीसी) के माध्यम से अप्रैल से अक्टूबर माह तक बिजली खरीदने का समझौता किया। इसकी लैंडिंग कास्ट 7 रुपए 62 पैसे से 8.19 रुपए पड़ी। इस समयावधि में सरकार ने औसतन हर माह करीब 50 से 60 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी। आश्चर्यजनक यह है कि इस दौरान इस कंपनी के अलावा केरल सहित अन्य कंपनियों से इससे कम दर पर उपलब्ध बिजली नहीं खरीदी गई। गर्मियों में इतनी महंगी बिजली खरीदने पर बिजली कंपनियों ने आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने बिजली खरीदने के निर्देश दे दिए।
कैसे लगी चपत
गर्मी में उत्तरी ग्रिड से अतिरिक्त बिजली लेना आसान रहता है। इन महीनों के दौरान उत्तरी ग्रिड की औसतन फ्रिक्वेंसी 49.50 से 49.70 हट्र्ज रही। अगर बिजली कंपनियां ग्रिड से भी ओवरड्राल करतीं तो इसके बदले उन्हें तीन से साढ़े तीन रुपए प्रति यूनिट देने होते। ऐसे में अगर छह माह में 40 करोड़ यूनिट ओवर ड्रा करती तो इसके बदले उन्हें करीब 133 करोड़ रुपए ही चुकाने पड़ते। अगर अन्य स्त्रोतों- केरल इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड सहित अन्य माध्यमों से भी बिजली खरीदी जाती तो इसके बदले करीब ढाई सौ करोड़ रुपए ही चुकाने पड़ते। पीटीसी के जरिये महंगी बिजली खरीदने के कारण सरकार को करीब 350 करोड़ रुपए से ज्यादा चुकाने पड़े।
जरूरत सर्दी में, खरीदी गर्मी में
राजस्थान में साधारणतया बिजली की मांग नवंबर से निकलना शुरू होती है। इस कृषि सीजन के लिए पिछले कुछ सालों से बिजली कंपनियां बाहर से बिजली खरीदती हैं। गत वर्र्षो में तो इस दौरान बिजली कटौती भी होती रही है। गर्मियों में बिजली की मांग का आकंड़ा 9 से 10 करोड़ यूनिट रोजाना के करीब रहता है तो सर्दियों में यह आकंड़ा 1150 करोड़ यूनिट के आसपास रहता है। इसकी पूर्ति के लिए कभी कटौती से तो कभी बाहर से बिजली खरीद कर काम चलाया जाता है। राजस्थान के पास ज्यादातर समय करीब 9 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध रहती ही है।
गर्मियों में इतनी महंगी क्यों? गर्मियों और मानसून में महंगी बिजली खरीदने से इस क्षेत्र के जानकार भी आश्चर्य में हैं। सेवानिवृत्त इंजीनियर आर.के. शर्मा का कहना है कि कृषि सीजन में तो बिजली के कुछ ज्यादा पैसा लगते हैें, लेकिन गर्मियों में इतनी महंगी बिजली क्यों ली गई, यह उनकी समझ में नहीं आ रहा। इस संबंध में बिजली सचिव यदुवेन्द्र माथुर का कहना है कि यह सही है कि हमने काफी महंगी बिजली खरीदी। सरकार ऐसा ही चाहती थी क्योंकि किसी भी स्थिति में बिजली कटौती नहीं हो, यह हमने तय किया था, इसीलिए महंगी बिजली खरीदी गई।
गर्मियों में ज्यादा और सर्दियों में कम दाम
राजस्थान में कृषि सीजन (सर्दियों में) अब तक कुछ अतिरिक्त दाम देकर बिजली खरीदी जाती रही है। इस बार नवंबर माह के लिए रोज एक करोड़ यूनिट बिजली की अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है। इसकी कीमत साढ़े पांच रुपए से साढ़े छह रुपए तक है। जानकार बताते हैं कि ऐसा पहली बार हुआ है कि गर्मियों और मानसून में बिजली खरीदी गई। इतनी महंगी दर तो कृषि सीजन के लिए भी संभवतया कभी नहीं दी गई।
यह कैसी खरीद
पीटीसी के जरिये 40 करोड़ यूनिट से ज्यादा बिजली खरीदी गई। इसमें से करीब पौने 9 करोड़ यूनिट बिजली पंजाब में जमा की गई। इसके तहत राजस्थान को जब जरूरत होगी, तब जमा बिजली वह पंजाब से ले लेगा। इसको खरीदने में करीब ८क् करोड़ रुपए का भुगतान किया और पंजाब में बैंकिंग करीब 50 करोड़ रुपए की करवाई।
हां, बिजली काफी महंगी खरीदी है
बिजली प्रसारण कंपनी के सीएमडी श्रीमत पांडेय से भास्कर की बातचीत..
* गर्मियों और मानसून में बिजली खरीदी गई?
- गर्मियों में हमने पहली बार बिजली खरीदी थी।
* क्या बिजली खरीद की कीमत ज्यादा नहीं थी?
- यह सही है कि हमने बिजली काफी महंगी खरीदी। इसमें किसी तरह की कोई गड़बड़ नहीं है। सरकार चाहती थी कि किसी भी कीमत पर बिजली की कमी नहीं रहे और न ही किसी तरह की कटौती हो। इससे हमने करीब तीन सौ करोड़ रुपए का अतिरिक्त रेवन्यू भी प्राप्त किया। सरकार के निर्देश के बाद कोर्डिनेशन कमेटी में मामले को ले जाकर बिजली खरीदी गई।
* क्या कुछ अन्य स्थानों से सस्ती बिजली उपलब्ध थी?
- इसके लिए पहले समझौता करना होता है। उस समय कहीं और बिजली नहीं थी। केरल की बिजली अप्रैल से जून तक उपलब्ध थी। पीटीसी से जो समझौता किया था कि उसमें पूरी बिजली नहीं लेने पर पेनल्टी का प्रावधान था। बिजली सेलर्स का मार्केट है। यह सही है कि काफी महंगी बिजली ली।
* महंगी बिजली लेकर पंजाब को कम पैसे में जमा कराने का क्या मतलब?
- इसको इस तरह लेना उचित नहीं है। महंगी-सस्ती का मतलब नहीं है। पंजाब से हम बिजली लेते हैं तो उसे देनी भी पड़ेगी।