भोपाल. मुरैना में अवैध खनन माफिया से निपटने के लिए जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को निजी सुरक्षा एजेंसियों की मदद लेनी पड़ी है, वहीं इस समस्या के चलते जिला प्रशासन ने वहां सशस्त्र बल की एक विशेष कंपनी तैनात करने की मांग की है। ताकि 40 से 50 जवान इसी मोर्चे पर लगाए जा सकें।
प्रशासनिक रोक के बावजूद अवैध खनन के चलते न तो यहां के सैकड़ों साल पुराने मंदिर सुरक्षित हैं, न ही चंबल की घड़ियाल सेंक्चुरी। माफिया की हिम्मत का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले शनिवार बटेसर के पास चल रही खदानों का मुआयना करने गए कलेक्टर आकाश त्रिपाठी, एसपी हरिसिंह यादव और डीएफओ एसपी शर्मा को गोलियों का सामना करना पड़ा।
डीएफओ का बीते तीन महीने में माइनिंग माफिया से यह तीसरा आमना-सामना था। इसी तरह चंबल की घड़ियाल सेंक्चुरी में रेत खनन रोकने के प्रयास में पुलिस बल को पांच सालों में 35 हमले झेलने पड़े।
बटेसर की बदहाली
डेढ़ हजार साल पुराने मंदिर संकुल में दो साल से जीर्णोद्घार का काम जारी है। जबकि आसपास वैध-अवैध खदानों में चल रहे खनन तथा खदानों के धमाके बमुश्किल नया रूप ले रहे इन मंदिरों के लिए नया खतरा बन चुके हैं। एक मंदिर का कलश तो धमाकों के कारण गिर भी चुका है। ग्वालियर में एएसआई के पुरातत्वविद् श्री राठौर ने भास्कर को बताया कि मंदिर दो महीने से निजी सुरक्षा एजेंसी के हवाले हैं।
सेंक्चुरी का सूरते-हाल
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार एक साल से खनन बंद है, लेकिन खनन माफिया अब भी सक्रिय हैं और उसकी सक्रियता से घड़ियालों के अंडे देने के ठिकाने बर्बाद हो गए। इस स्थान की हिफाजत के लिए केवल एक दर्जन निहत्थे फारेस्ट गार्ड और तीन रेंजर ही पदस्थ हैं।
करीब छह महीनों से खनिज अधिकारी का पद खाली है और एकमात्र इंस्पेक्टर के भरोसे पूरा कामकाज है। वल्र्ड कंजर्वेशन यूनियन के सदस्य डॉ. आरजे राव ने भास्कर से कहा कि सन् 1997 में 1289 घड़ियाल थे, जो 2006 में घटकर 772 रह गए। अब जरूर इनकी संख्या में इजाफा हुआ है और 2007 की गणना में 865 पाए गए हैं, लेकिन इनकी रक्षा के लिए खनन रोकना जरूरी है।
>> -‘‘करीब छह महीने पहले आठ खदानों की लीजें निरस्त कीं। बीते सप्ताह जब्त करीब 70 लाख रुपए मूल्य की दो क्रेनों के राजसात करने की कार्रवाई जारी है। समस्या के स्थायी निराकरण की कोशिश की जा रही है।’’
-आकाश त्रिपाठी, कलेक्टर, मुरैना
>> -‘‘तीन महीने में हमले की यह तीसरी घटना है। खनन में लगे लोग काफी सक्षम हैं और सब तरह के हथियारों से लैस हैं। इनसे निपटने के लिए व्यापक इंतजाम जरूरी हैं। ’’
-एसपी शर्मा, डीएफओ, मुरैना