भोपाल. केंद्र सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति से भरे जाने वाले पदों का कोटा बढ़ाने से मना कर दिया है। केवल पांच फीसदी पद ही इस प्रक्रिया से भरे जा सकेंगे। इससे अनुकंपा नियुक्ति के लिए राहत की उम्मीद कर रहे केंद्र सरकार सहित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी है। इस मामले पर राय देने के लिए गठित संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह निर्णय लिया है।
बैंक और बीमा क्षेत्र में यह कोटा शून्य है। वर्तमान में अनुकंपा नियुक्ति के एक लाख मामले लंबित हैं। इस निर्णय के बाद केंद्र सहित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों और बीमा क्षेत्र में कार्यरत लगभग 50 लाख कर्मचारियों में से किसी की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना होगा। फिलहाल इस नियुक्ति के करीब एक लाख मामले लंबित हैं।
पहले से ही थी मुसीबत
केंद्र सरकार में गत 2001 से अनुकंपा नियुक्तियां लगभग बंद हैं। ऐसे में समिति की अनुशंसाओं पर उन सभी लोगों की निगाह लगी हुई थी, जिनके ऐसे प्रकरण लंबित हैं।
समिति ने यह भी कहा
भास्कर के पास मौजूद संसदीय समिति की रिपोर्ट में यह भी अंकित है-‘समिति इस बात की अनुशंसा करती है कि अनुकंपा नियुक्ति की नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय विभागों की तरह बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बीमा सेवाओं में एक सामान नियम बनाए जाएं।’
क्या तर्क है
इस निर्णय के पीछे तर्क दिया गया है कि सरकार विभागों का स्वरूप छोटा कर रही है। जिसके तहत 100 पद खाली होने पर उसमें से 66 पद समाप्त कर दिए जाते हैं। ऐसे में सभी लंबित प्रकरणों में अनुकंपा नियुक्ति देना संभव नहीं है।
राहत भी
कार्मिक प्रशिक्षण विभाग ने यह निर्णय भी लिया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के 24 बैंकों, 40 उपक्रमों और बीमा सेवा में अनुग्रह राशि की बजाय केंद्रीय सेवाओं के अनुसार ही अनुकंपा नियुक्ति का कोटा तय किया जाए।
ये थे समिति के सदस्य
गत पांच अगस्त को गठित संसदीय समिति के अध्यक्ष डॉ. ईएम. सुदर्शन नचिअप्पा थे। संसदीय समिति में राज्यसभा से 10 और लोकसभा से 16 सांसद सदस्य थे। समिति ने भोपाल, गोवा, मुंबई, बेंगलूर, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्ची, पोर्ट ब्लेयर, कोलकाता में केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले उपक्रमों और बैंकों में पहुंचकर अधिकारियों की राय जानी। समिति ने गत 6 सितंबर को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।
मप्र में लंबी कतार
प्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति के केंद्रीय विभागों में 4 हजार मामले लंबित हैं, जिनकी राजधानी में 600 से ज्यादा संख्या है। इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में इस तरह के 2 हजार मामले लंबित हैं, जिनकी राजधानी में 200 से ऊपर संख्या है।