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सुधारेगा ट्रैफिक, चलाएगा मेट्रो ट्रेन

भोपाल. राज्य में पहली बार शहरी विकास नीति तैयार होने जा रही है। शीघ्र ही होने वाले इस काम के तहत सबसे महत्वपूर्ण योजना शहरी परिवहन प्राधिकरण बनाने की है, ताकि शहरों में बढ़ते यातायात के दबाव को व्यवस्थित किया जा सके।

इस प्राधिकरण की हर शहर स्तर पर एक यूनिट रहेगी। यही प्राधिकरण भविष्य में राज्य में मेट्रो ट्रेन की योजना लागू करने में भी मददगार साबित हो सकता है। नीति में नगरों की जमीनों का बेहतर प्रबंधन करने और मास्टर प्लान बनाने का दायित्व नगरीय निकायों को सौंपने का प्रस्ताव है।

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने अर्बन मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की तर्ज पर राज्य स्तर पर ऐसा ही परिवहन प्राधिकरण बनाने का सुझाव दिया है। दिल्ली और बेंगलूर में ऐसी एजेंसी अस्तित्व में आ गई है। अब मप्र में भी यह काम करने का इरादा है।

ऐसी एजेंसी बनने के बाद शहरी परिवहन और यातायात से जुड़ा समस्त कार्य परिवहन प्राधिकरण को सौंपा जाएगा, ताकि राजधानी भोपाल समेत सभी प्रमुख शहरों में एक समान परिवहन और यातायात व्यवस्था कायम की जा सके।

वर्तमान में भोपाल में आधा दर्जन और इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर तथा रीवा-सतना में अलग-अलग एजेंसी यह काम करती हैं। प्रदेश सरकार का इरादा इस प्राधिकरण को चौक चौराहों को ट्रैफिक इंजीनियरिंग के मान से तैयार करने और गतिअवरोधक, फुटपाथ,रोड डिवाइडर, ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का दायित्व सौंपने का है।

प्राधिकरण को प्रशिक्षित अमले से सुसज्जित कर इसे ट्रॉफिक चालान से मिलने वाली राशि तक सौंपने का सुझाव है। प्राधिकरण को सड़कों में यातायात सुगम बनाने के वास्ते सड़कों के निर्माण से लेकर शहर के परिवहन और यातायात व्यवस्था से जुड़े सभी मामलों में भागीदार बनाने का भी विचार है। बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत भोपाल और इंदौर में चल रही स्टार बसों का संचालन भी इसी प्राधिकरण के अधीन हो जाएगा।

निकाय बनाए मास्टर प्लान
आवास नीति में धीरे-धीरे मास्टर प्लान बनाने का जिम्मा नगरीय निकायों को सौंपने का विचार है, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पा रहा है। हाल ही में आयोजित मेयर कांफ्रेस में मेयर्स ने भी मास्टर प्लान का नगरीय निकाय से सीधा संबंध बताते हुए इसे तैयार करने के अधिकार निकायों को देने की मांग की थी।

लीक से हटकर बैठक
शहरी विकास नीति का प्रारूप बनकर तैयार हो गया है। इस पर वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में विचार के बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष लाया जाएगा। सरकारी माहौल से अलग हटकर सोचने और कुछ नए सुझावों को नीति में शामिल करने की गरज से एक अभिनव प्रयोग किया गया। जिसके तहत इस मुद्दे पर विचार के लिए वरिष्ठ सचिव समिति की अनौपचारिक बैठक गुरुवार रात होटल जहांनुमा पैलेस में हुई।

इसमें प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास राघवचंद्रा, प्रमुख सचिव जेल दिलीप मेहरा, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एमएम उपाध्याय, सचिव एवं आयुक्त नगरीय प्रशासन तथा विकास मलय श्रीवास्तव और विधि एवं विधायी सचिव एके श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।

जमीन प्रबंधन निकायों के जिम्मे
शहरों में यहां-वहां बेतरतीब पड़ी खाली जमीनों के प्रबंधन का जिम्मा नगरीय निकायों को देने का प्रावधान किया जा रहा है। निकायों का जमीन के मालिकाना हक से कोई सरोकार नहीं रहेगा, लेकिन खाली पड़ी जमीन का वह पार्किग और अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग कर सकेंगे।

निजी जमीन होने पर उसके मालिक को कुछ राशि देने का भी सुझाव है। शहरों को साफ-सुथरा रखने की गरज से वहां बढ़ते कचरे के निपटान के लिए भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की नीति बनाने का भी प्रस्ताव है।





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