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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राजस्थान स्टांप एक्ट की धारा 65 की वैधानिकता को चुनौती देने वाली 60 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश एनपी गुप्ता एवं न्यायाधीश मुनिश्वरनाथ भंडारी ने यह आदेश महेश मंत्री व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में दिए।
याचिकाकर्ता ने स्टांप एक्ट की धारा 65 के तहत राजस्व मंडल में निगरानी याचिका दायर करने के लिए विवादित राशि का पचास प्रतिशत धन राज्य सरकार में जमा कराने के प्रावधान को चुनौती दी थी। याचिकाओं में कहा गया कि स्टांप एक्ट का यह प्रावधान भारतीय संविधान के विरुद्ध है क्योंकि यह पीड़ित पक्ष को न्याय प्राप्त करने से वंचित करता है। विधायिका को यह अधिकार नहीं है कि यह किसी व्यक्ति के न्याय प्राप्त करने के मौलिक अधिकार का हनन करे। याचिका में यह भी कहा गया कि कोई भी कानून वैधानिक अधिकार को समाप्त नहीं कर सकता। इसलिए स्टांप एक्ट का यह प्रावधान असंवैधानिक व विधि विरुद्ध है।
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मरडिया कैमिकल मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय प्राप्ति के लिए अपील करने से पूर्व भारी प्री-डिपोजिट को उचित नहीं माना। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नरपतमल लोढ़ा ने कहा कि कर व राजस्व संबंधी मामलों में इस प्रकार की शर्त होना न केवल न्याय बल्कि आम जनता के हित में भी है।
लोढ़ा ने कहा कि यदि इस तरह का प्रावधान नहीं होगा तो राज्य को भारी राजस्व की हानि होगी तथा कर अपवंचन करने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहन मिलेगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि स्टांप एक्ट के तहत निगरानी याचिका पेश करने से पूर्व पचास प्रतिशत राशि जमा करवाने का प्रावधान वैध है। यद्यपि खंडपीठ ने यह भी कहा कि सरकार को इस प्रावधान में कुछ सीमा तक शिथिलता करनी चाहिए ताकि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों पर विपरीत प्रभाव पड़ने से रोका जा सके।