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जोधपुर. राखी हाउस के जिस एटीएम ने पांच हजार रुपए का बोनस दिया था, वह उम्मेद चौक के दिलीप कुमार के खाते से निकला था। दिलीपसिंह ने गुरुवार को
बैंक मैनेजर से संपर्क कर एटीएम में हुई गड़बड़ी की शिकायत की।
दिलीप कुमार का कचहरी परिसर की एसबीआई बैंक में खाता है। उसके खाते में बुधवार को 9 हजार 4 सौ 69 रुपए जमा हुए। रात 8. 13 पर वह राखी हाउस स्थित बैंक के एटीएम सेंटर पर गया। वहां उसने कार्ड डाल कर पांच हजार रुपए का कमांड दिया। पैसा नहीं निकला, स्लिप में लिखा आया सॉरी, अनेबल टू प्रोसेस। फिर उसने दूसरी बार पांच हजार रुपए का कमांड 8. 19 मिनट पर दिया तो रुपए निकल गए। वह रुपए लेकर अपने घर चला गया, मगर बाद में पता चला कि एटीएम से उसके खाते से दस हजार रुपए डेबिट हुए हैं।
वे पांच हजार रुपए उसके पश्चात ट्रांजेक्शन करने वाले अशोक कुमार जोशी को बोनस के रूप में मिल गए जोशी ने कमांड तो एक हजार रुपए का दिया था, परंतु मशीन ने उसके हाथ में छह हजार रुपए थमा दिए। यही नहीं उसके बैलेंस में भी महज एक हजार रुपए की ही कटौती हुई। बैंक अधिकारियों ने दिलीप कुमार को मशीन की गड़बड़ी ठीक कर उसकी राशि लौटाने का वादा किया है।
बैंकों में लापरवाही का आलम
बार-बार होने वाली गड़बड़ियों के बावजूद बैंक अधिकारी इन मशीनों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पिछले वर्ष 3 जून को 12 वीं कक्षा के छात्र ललित मूथा ने एसबीआई व एसबीबीजे के एटीएम सेंटर से करीब चार लाख रुपए निकाल लिए। वह प्रोसेस की गड़बड़ी पहचान गया और रुपए निकालने लगा। उसने छह-सात पुलिसकर्मियों का वेतन भी पार कर लिया था। उस वक्त एसबीआई के एटीएम ऑपरेसंस के एजीएम आरपी रहेरिया ने स्वीकार किया था तकनीकी खराबी के कारण करेंसी निकलने में कभी-कभी गलती हो जाती है, मगर उसे ठीक कर लिया जाता है।
एसबीआई के एटीएम की कमी
एसबीआई के एटीएम की मुख्य खामी यह है कि किसी भी कार्ड से मशीन का कंप्यूटर तीन-चार चरण तक आगे बढ़ जाता है और वह रुपए भरने के कमांड तक पहुंच जाता है, ऐसा अन्य बैंकों की एटीएम में नहीं होता। पहले ही चरण में कमांड खारिज हो जाता है। व्रिडावल स्लिप को हाथ से रोक देने से भी मशीन में गड़बड़ी हो जाती है।
इसलिए होती है गड़बड़
विशेषज्ञों के मुताबिक एटीएम में सौ व पांच सौ के नोट रीड करने के लिए अलग सेंसर लगे होते हैं। सेंसर में खराबी आने से करेंसी नोट कम-ज्यादा निकल जाते हैं। इसी प्रकार अमाउंट का कमांड देने के समय मशीन में करेंसी खत्म हो जाती है तो रकम नहीं निकलती, मगर सेटेलाइट के माध्यम से सर्वर में मौजूद खाते में रकम डेबिट हो जाती है।