इंदौर. हीरानगर थाने में पुलिस की बर्बरता से घनश्याम मंडलोई की मौत को अभी 15 दिन नहीं हुए थे कि बुधवार को ऐसा ही एक मामला फिर हो गया। आपसी लेनदेन के विवाद को लेकर संयोगितागंज सीएसपी ऑफिस में पदस्थ आरक्षक ने एक प्रॉपर्टी ब्रोकर की निर्ममता से पिटाई की। उसके शिकंजे से निकलने के बाद प्रापर्टी ब्रोकर आत्महत्या पर उतारू हो गया। इस पर तत्काल एसपी ने उसे समझाइश देकर रोका और आरक्षक को निलंबित कर दिया।
निलंबित आरक्षक का नाम राजीवसिंह है, जो सीएसपी ऑफिस में कम्प्यूटर ऑपरेटर है। कुछ माह पहले उसने प्रॉपर्टी ब्रोकर विजय शर्मा निवासी राजेंद्रनगर से संपर्क किया और वीरसावरकरनगर में दो प्लॉट खरीदने की बात कही। इस पर विजय ने कहा कि वह अवैध कॉलोनी है, इसके लिए कच्ची रसीद मिलेगी।
इस पर राजीवसिंह ने कहा कि आप मुझे कॉलोनाइजर से मिलवाकर प्लॉट दिला दें, बाकी में अपने स्तर पर निपट लूंगा। मेरी पहुंच एडीशनल एसपी तक है। इस पर विजय ने उसे प्लॉट मालिक से मिलवा दिया। दोनों पार्टियों के बीच दो प्लॉटों का सौदा 2.20 हजार में हुआ।
इसमें से राजीवसिंह ने उसे 1.40 लाख रु. दे दिए जबकि 80 हजार रु. का चेक दिया। इस सौदे के लिए विजय को दलाली के 3 हजार रु. मिले थे। इसके बाद तीन माह तक जब राजीवसिंह को प्लॉट नहीं मिला तो उसने विजय पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
बुधवार शाम उसने विजय को अपने ऑफिस में बुलाया। इस पर वह पत्नी सरिता के साथ पहुंचा तो राजीव उसे अंदर ले गया दरवाजा बंद किया और लाठी से जबर्दस्त पिटाई की और कहा अगर रुपए नहीं दिए तो उसे ड्रग्स के मामले में फंसा देगा।
विजय ने कहा कि वह तो दलाली करता है। इसका उससे कोई संबंध नहीं। इस पर राजीव ने दरवाजा बंद किया और लाठी से उसकी जबर्दस्त पिटाई की। इसके साथ ही धमकी दी कि अगर रुपए नहीं दिए तो वह उसे ड्रग्स के मामले में फंसा देगा।
परिवार सहित खत्म कर देंगे
गुरुवार सुबह 6 बजे फिर दो युवक विजय के घर पहुंचे और उसे धमकी दी कि जो कुछ हुआ है उसे लेकर चुप रहे। अगर कोई गड़बड़ी हुई तो तुझे पूरे परिवार सहित खत्म कर देंगे। इस बात से भी विजय ने सीएसपी को अवगत करा दिया है।
सीएसपी ऑफिस में पिटाई का दूसरा मामला
संयागितागंज सीएसपी ऑफिस में करीब तीन साल पहले ऐसी ही एक घटना हुई थी जिसमें सीमा अग्रवाल की पिटाई की गई थी। मामले की गूंज भोपाल तक हुई जिसमें तत्कालीन सीएसपी विनीत जैन सहित अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद कल दूसरा मामला हुआ। इसके अलावा अन्य मामलों में भी पुलिसकर्मियों की शिकायतें अधिकारियों को मिलती रही हैं।
‘आरक्षक मार डालेगा इसलिए मैं आत्महत्या कर रहा हूं..’
मारपीट के बाद विजय को अपने साथी आनंदसिंह के साथ यह कहकर रवाना किया कि आज किसी भी हालत में रुपए का इंतजाम हो जाना चाहिए। आनंदसिंह उसे लेकर रवाना हुआ और रास्ते में गीताभवन पर किसी काम से रुका। इस बीच विजय मौका देखकर गली-कूचों में से होते हुए तिलकनगर पहुंचा और वहां से सिटी बस से लोकनायक नगर में अपने रिश्तेदार के यहां पहुंचा।
तब तक उसकी पत्नी भी वहां पहुंच चुकी थी। वहां पहुंचते ही विजय फफक पड़ा। रिश्तेदारों ने उसे समझाइश दी तो उसने पिटाई के निशान बताए। इसके बाद उसने एसपी अंशुमान यादव को फोन किया। उसने कहा आरक्षक उसे मार डालेगा इसलिए मैं आत्महत्या कर रहा हूं।
इस पर एसपी ने उसे समझाइश दी। उन्होंने सीएसपी संजयसिंह को उसके पास रवाना किया कि वह कुछ न बैठे। उसे मेडिकल के लिए ले गए। साथ ही उसकी बाइक वापस दिलाई। दो पुलिसकर्मी उसके घर पर ड्यूटी पर लगाए।