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इंदौर.
पुष्य नक्षत्र में लक्ष्मी घर लाने का रिवाज है लेकिन एक मजबूर मां ने महज 29 दिन पहले जन्मी ‘लक्ष्मी’ को बेघर कर दिया। बच्ची गुरुवार दोपहर तीन बजे अन्नपूर्णा मंदिर में मिली। तब वहां ज्यादा भीड़ भी नहीं थी। अचानक कोने से रोने की आवाज आई तो चौकीदार मधु भागकर पहुंचा।
देखा एक बच्ची कंबल में लिपटी रो रही थी। पास ही उसके कुछ कपड़े और एक चिट्ठी रखी थी। थोड़ी ही देर में आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। मंदिर के सामने होटल चलाने वाले सुशील सिलावट ने बताया चिट्ठी में लिखा है बच्ची माहेश्वरी समाज की है।
उसका जन्म 3 अक्टूबर 2007 को हुआ है। मुझे पहले से तीन लड़कियां हैं और गरीबी के कारण मैं इसे नहीं पाल सकती। चिट्ठी में नाम-पता कुछ भी नहीं लिखा है। अन्नपूर्णा थाने के मुताबिक बच्ची को जिला अस्पताल भेजा गया। उसे कहां रखा जाए यह एसडीएम तय करेंगे।
नंदिनी भी चाइल्डलाइन में
अन्नपूर्णा मंदिर में आठ महीने पहले ढाई साल की नंदिनी को उसकी मां छोड़ गई थी। वह अभी तक चाइल्डलाइन की ही देखरेख में है।
..तो समाज लालन-पालन का बीड़ा उठाएगा
माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष गिरधारीलाल शारडा और इंदौर जिला माहेश्वरी युवा संगठन के अध्यक्ष नितिन माहेश्वरी ने बताया बच्ची की मां को ढूंढ़ने की पूरी कोशिश करेंगे। मिल जाने पर उसे आर्थिक मदद दी जाएगी ताकि बच्ची की परवरिश हो सके।
यदि मां नहीं मिली तो समाज के ही नि:संतान दंपति को गोद देने के प्रयास किए जाएंगे। यह भी संभव नहीं हुआ तो समाज ही बच्ची के लालन-पालन का बीड़ा उठाएगा।